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अयोध्या : श्रद्धालुओं ने की रामकोट व पंचकोसी परिक्रमा

अयोध्या : श्रद्धालुओं ने की रामकोट व पंचकोसी परिक्रमा

संक्षेप:

Gonda News - अयोध्या में पौष शुक्ल एकादशी/द्वादशी पर रामकोट परिक्रमा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। शारीरिक अशक्तता के कारण जो श्रद्धालु पंचकोसी में शामिल नहीं हो सके, उन्होंने रामकोट की परिक्रमा की। यह परिक्रमा संतों की अगुवाई में नियमित रूप से होती आ रही है, और श्रद्धालुओं का रुझान बढ़ रहा है।

Dec 01, 2025 08:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोंडा
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से आयोजित परिक्रमा में बढ़ते जा रहे श्रद्धालु श्रद्धालुओं के जत्थे भी रामकोट परिक्रमा में अलग-अलग समय में ले रहे हिस्सा अयोध्या। संवाददाता पौष शुक्ल एकादशी/द्वादशी के पर्व पर सोमवार को रामकोट परिक्रमा के साथ रामनगरी की पंचकोसी परिक्रमा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और श्रद्धापूर्वक परिक्रमा पूरी की। रामनगरी की उपासना परम्परा के संत हर माह की दो एकादशी तिथि को पंचकोसी परिक्रमा करते रहे हैं जबकि कार्तिक शुक्ल एकादशी यानि देवोत्थानी एकादशी के अवसर पर यहां लाखों कल्पवासियों के साथ मेलार्थी भी शामिल होते हैं। उसी कड़ी में सोमवार को भी इस परिक्रमा में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर पुण्यार्जन किया।

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वहीं शारीरिक अशक्तता के कारण जो श्रद्धालु पंचकोसी में शामिल नहीं हो सके, उन सभी ने रामकोट की परिक्रमा की। श्रीराम जन्मभूमि के चतुर्दिक होने वाली यह परिक्रमा नियमित रूप से हिंदी नववर्ष की पूर्व संध्या पर होती रही। वहीं रामनगरी की 84 कोसी परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालु गण भी सीताकुंड अयोध्या में परिक्रमा समापन के पूर्व रामकोट की परिक्रमा करते रहे हैं। वहीं राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से 20 अगस्त 2025 को दैनिक रुप में रामकोट की परिक्रमा की शुरुआत की थी। तब से यह परिक्रमा संतों की अगुवाई में अनवरत चल रही है। इस परिक्रमा के प्रति धीरे धीरे श्रद्धालुओं का रुझान बढ़ रहा है। इसके कारण भीड़ भी शामिल होने लगी है। तीर्थ क्षेत्र ने इस परिक्रमा के लिए हर दिन अलग-अलग मंदिरों के संत-महंतों के माध्यम का अभियान शुरू किया था। अनवरत परिक्रमा को देखते हुए एक तरफ जहां कई गृहस्थों ने भी परिक्रमा शुरू की है। उधर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के जत्थे भी शामिल होना शुरू हो गये है। यह अलग बात है कि इन जत्थों की परिक्रमा का समय निर्धारित नहीं रहता है। जत्थों के श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार समय तय करते हैं। ---