बोले गोण्डा : छोटे कारोबारी संकट में पड़े, कई ठेले वालों की दुकानें बंद
Gonda News - जिले में होली के बाद से LPG सिलेंडर की किल्लत बनी हुई है। उपभोक्ताओं की लंबी कतारें और छोटे होटलों पर असर पड़ा है। ठेले-खोमचे वाले महंगे विकल्पों पर निर्भर हो रहे हैं और कई दुकानदारों ने अस्थायी भट्ठियां बनाई हैं। गैस की कमी से रोजी-रोटी का संकट बढ़ रहा है।
जिले में होली के बाद से ही एलपीजी सिलेंडर के लिए मारामारी कम नहीं हो रही है। तकरीबन बीस दिन बाद भी एजेंसियों और सिलेंडर गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें नजर आ रही है। इसका सबसे बड़ा असर ठेले-खोमचे के साथ छोटे होटलों पर पड़ा है। ठेले खोमचे वाले सिलेंडर न मिलने से लकड़ी या कोयले की भट्ठी व इंडक्शन चूल्हा जलाने पर मजबूर है। हालांकि जिला मुख्यालय पर काम करने आने वाले अधिकांश श्रमिक आसपास से आते हैं इसलिए उनके ऊपर गैस संकट का खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। हिन्दुस्तान ने बोले गोंडा मुहिम के तहत कई एजेंसियों पर पड़ताल की।
शहर की मंगलम गैस एजेंसी पर आए उपभोक्ताओं ने कहा कि बुकिंग के बाद सिर्फ तारीख मिल रही है, सिलेंडर नहीं। लोगों ने कहा कि एजेंसियों की मनमानी पर अफसरों को जांच कराकर कार्रवाई करनी चाहिए। जिला मुख्यालय से लेकर रूपईडीह, वजीरगंज, रगड़गंज, धानेपुर, कौड़िया, मनकापुर, कटरा बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों में होटल और फास्ट फूड के ठेले बंद हो गए हैं। या कि जिनका किसी प्रकार कोई जुगाड़ है उन्हीं की दुकानें खुली हैं। सभी ने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। जिले में गैस सिलेंडर आपूर्ति सामान्य होने का अफसरों का दावा बेमानी साबित हो रहा है। होली के बीस दिन बीत जाने के बाद भी रसोई गैस के लिए एजेंसियों पर लोगों की कतारें कम नहीं हो रही है। सिलेंडर की कमी के चलते फास्ट फूड सहित विभिन्न होटलों पर खाने की सामग्रियों के दाम बढ़ गए हैं। हिन्दुस्तान के बोले मुहिम के तहत पड़ताल में सच्चाई सामने आई। मनकापुर बस अड्डा पर छोला-चावल, भटूरा और पूड़ी बेचने वाले ठेला संचालक ने बताया कि एक सिलेंडर पांच से छह दिन तक चलता है। होली के बाद सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा है, जिसके कारण खाद्य सामग्री के दाम बढ़ाए गए हैं। यही हाल अन्य होटल और ठेला संचालक का भी है। अब घर से रोटी लेकर आते हैं मजदूर: जिले में गैस सिलेंडर की किल्लत से आम आदमी की दुश्वारी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा दूर-दराज इलाकों से आने वाले सैकड़ों मजदूर जिला मुख्यालय की सब्जी मंडी, नवीन गल्ला मंडी और रानी बाजार में पल्लेदारी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यह मजदूर सुबह घर से रोटी लेकर निकलते हैं और बाजार से सब्जी खरीदकर दोपहर में भोजन करते हैं, जबकि कई मजदूर ठेले-खोमचे और छोटे होटलों पर निर्भर रहते हैं। गैस सिलेंडर की कमी का सीधा असर इन ठेले और छोटे खाद्य विक्रेताओं पर पड़ा है। सिलेंडर उपलब्ध न होने या महंगा मिलने के कारण कई ठेले-खोमचे वाले दोपहर के समय दुकानें बंद रखने को मजबूर हैं। इससे मजदूरों को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ दुकानदारों ने गैस सिलेंडर की जगह अस्थायी भट्ठियां बना ली हैं, जिन पर वे खाद्य सामग्री तैयार कर रहे हैं। गैस संकट ने बदली तस्वीर, डीजल भट्ठी का उपयोग बढ़ा: इटियाथोक क्षेत्र में लगातार रसोई गैस की किल्लत ने अब छोटे-बड़े कारोबारियों को भी भी बदल दिया है। गैस सिलेंडर की अनियमित सप्लाई और लंबा इंतजार व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। ऐसे में कारोबार ठप न पड़े, इसके लिए अब डीजल भट्ठी सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है। हालात यह हैं कि बाजार में डीजल भट्टी की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। ढाबा संचालकों, चाय-नाश्ते की दुकानों, मिठाई कारोबारियों ने गैस की जगह डीजल भट्ठी का उपयोग तेज कर दिया है। गोंडा रोड स्थिति सुरेश चाट एवं भोजनालय के संचालक सुरेश शुक्ला ने बताया गैस की किल्लत से कारोबार में दिक्कत थी और गैस के भरोसे काम करना मुश्किल हो गया था। दिल्ली से डीजल भट्टी लाकर बिना रुकावट के काम करने में मददगार साबित हो रही है। सिविल लाइंस में गैस सिलेंडर के लिए उमड़ी भीड़: शहर के सिविल लाइंस पुलिस चौकी परिसर में सूर्या गैस एजेंसी द्वारा गैस सिलेंडरों का वितरण किया गया, जहां उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गैस सिलेंडर लेने के लिए करीब 150 से अधिक लोग लंबी लाइन में खड़े नजर आए। स्थिति यह रही कि मौके पर मौजूद पिकअप वाहन से कहीं अधिक संख्या में लोग लाइन में लगे हुए थे, जिससे अव्यवस्था का माहौल बन गया। लाइन में लगे उपभोक्ताओं का कहना था कि उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन वितरण की रफ्तार धीमी होने के कारण परेशानी बढ़ती गई। कई लोगों ने बताया कि भीड़ अधिक होने के बावजूद पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी देखने को मिली।वहीं, कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि समय पर सूचना न मिलने के कारण अचानक इतनी भीड़ एकत्र हो गई। यदि एजेंसी द्वारा सही तरीके से टोकन व्यवस्था लागू की जाती, तो स्थिति बेहतर हो जाती। आर्डर पर बन रहीं भट्ठियां, नहीं पूरी कर पा रहीं जरूरतबढ़ती मांग के चलते तैयार डीजल भट्ठियां बाजार में कम पड़ने लगी हैं। कई दुकानदार अब कारीगरों को आर्डर देकर भट्ठी बनवा रहे हैं। स्थानीय वेल्डिंग दुकानों और कारीगरों के पास काम का दबाव बढ़ गया है, जिससे उन्हें भी अच्छी आमदनी हो रही है। डीजल भट्ठी की बढ़ती मांग का असर उसकी कीमतों पर भी पड़ा है। जहां पहले ये भट्ठियां 10 से 12 हजार में उपलब्ध थीं, वहीं अब इनके दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। इसके बावजूद व्यापारी इन्हें खरीदने को मजबूर हैं, क्योंकि कारोबार चलाना उनकी प्राथमिकता है।डीजल की कम खपत से चलती है भट्ठी: डीजल भट्ठी में किसी सामान को बनाने में डीजल की कम खपत होती है। भट्टी में पाइप के माध्यम से डीजल की बूंदे जाती है डीजल जैसे मशीन में लगे बर्नर के पास पहुंचती है उसमें लगा इलेक्ट्रिक मोटर तीव्रता से डीजल को फव्वारा बनाकर भट्ठी को जला देता है। डीजल भट्ठी एक घंटे में करीब आधा लीटर डीजल की खपत होती है जो गैस से कम लागत में अच्छा उत्पादन देती है।गैस सिलेंडर की कमी से आजीविका भी हुई प्रभावितगोण्डा। रुपईडीह क्षेत्र में कमर्शियल गैस कनेक्शन न मिलने के कारण व्यापारियों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस की उपलब्धता न होने से छोटे-बड़े व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। कामर्शियल गैस सिलेंडर न मिल पाने के कारण छोटे दुकानदारों के आर्थिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा हैं। गैस सिलेंडर न मिल पाने की वजह से रोजाना के जरुरी सामान खरीदने के लिए भी ठेले वालों को बहुत सोचना पड़ता हैं।आर्यनगर के त्रिवेनी प्रसाद जायसवाल, लल्लू जायसवाल और मल्लापुर के पुत्तन जायसवाल, कौड़िया के प्रद्युम्म गुप्ता व आशीष मोदनवाल सहित अन्य व्यापारियों ने बताया कि कामर्शियल गैस कनेक्शन उपलब्ध नहीं मिलने पर बाजार में ब्लैक में महंगे गैस सिलेंडर लेने से उनकी लागत बढ़ गई है, जिससे मुनाफा कम हो रहा है। कई दुकानदारों को मजबूरी में वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो सुरक्षित भी नहीं है। व्यापारियों ने अफसरों से मांग की है कि आसानी से मुहैया कराया जाए। कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से बढ़ी मुश्किलठेला संचालकों ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है। पहले आसानी से सामान्य सिलेंडर ही मिल जाता था। शहर के कच्चे बाबा मार्ग पर संचालित हो रही मंगलम गैस एजेंसी पर बुधवार को लोग पर्ची पाने, नंबर बदलवाने, सिलेंडर मिलने की जानकारी करने को लेकर संघर्ष करते दिखाई दिए। रिजवान अंसारी, सूरज लाल, चंद्रकांत ने कहा कि एजेंसी की कार्यप्रणाली की जांच होनी चाहिए। गैस एजेंसी का गोदाम पूरेललक के बाहर लाइन में खड़े लोगों ने बताया कि सिलेंडर बुकिंग कराने के बाद कई दिन तक सिलेंडर नहीं दिया जाता है। वहीं मोबाइल पर डिलिवरी का मैसेज जरूर आ जाता है। लोगों ने कहा कि मंगलम गैस एजेंसी पर हम लोगों को सिलेंडर की जगह सिर्फ तारीख मिलती है। शिवम गैस एजेंसी पर मौजूद ज्यादातर उपभोक्ता संतुष्ट दिखे, लोगों ने यहां आसानी से सिलेंडर घर पर भिजवा दिया जाता है। क्रांति उपवन पार्क के पास स्थित सूर्या गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं की भीड़ रही। लोगों ने कहा कि एजेंसी समय से सिलेंडर नहीं दे रही है, जिससे दिक्कत हो रही है। बस अड्डा के पास स्थित श्री साईं सिद्धि गैस एजेंसी पर भी सिलेंडर न मिलने के कारण लोग परेशान दिखाई दिए। मनकापुर, करनैलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र में भी रसोई गैस की भारी किल्लत है। लोग सुबह से शाम तक लाइन में लगने के बाद भी एक सिलेंडर नहीं पा रहे हैं। ठेलेवाले अभी चोरी चुपके महंगा सिलेंडर खरीदने पर मजबूर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दस रुपए में बिकने वाले चाय पन्द्रह रुपये में बिकने लगी है। मनकापुर रेलवे स्टेशन के पास पूड़ी-सब्जी की दुकानें गैस न मिलने के कारण दो-तीन दिनों से बंद हो गई है। लोग बोलेइन दिनों आम आदमी के लिए एक अदद सिलेंडर पाना मुश्किल हो गया है। बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिलता है। ठेले वाले भट्ठी पर खाना बना रहे हैं। -रिजवान अंसारीपहले आसानी से खाना मिल जाता था, लेकिन अब गैस की कमी से कई दुकानें बंद रहती हैं। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से जेब पर असर पड़ रहा है। -सूरज लालगैस सिलेंडर की किल्लत से दोपहर का खाना समय पर नहीं मिल पाता। ठेले बंद रहते हैं, जिससे परेशानी बढ़ गई है। -राकेश जिले में करीब पखवाड़े भर से गैस सिलेंडर की किल्लत का असर अब मजदूरा पेशा और ठेले वालों पर पड़ रहा है। जिले के आला-अफसर इस दिशा में ध्यान दे। -विनोद कुमार बोले जिम्मेदारजिले की गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को एलपीजी सिलेंडर मुहैया कराए जा रहे हैं। साथ ही निगरानी बढ़ा दी गई है। लोगों के अपील है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। नियमों के मुताबिक बुकिंग कराकर गैस सिलेंडर प्राप्त करें। -कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ प्रस्तुति: रंजीत तिवारी/हनीफ सिद्दीकी/दिनेश पांडेय/विजय मिश्र
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