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बोले गोण्डा: सड़क सुरक्षा पर हो पूरा ध्यान तो बच सकती है बहुतों की जान

बोले गोण्डा: सड़क सुरक्षा पर हो पूरा ध्यान तो बच सकती है बहुतों की जान

संक्षेप:

Gonda News - गोंडा जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे कई परिवारों को अपने प्रियजनों को खोने का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में हुए हादसों में पांच लोगों की मौत हुई है। सड़कें टूटी हुई...

Sep 09, 2025 04:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोंडा
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जिले की सड़कें रोजाना कहीं न कहीं खून से लाल हो रही हैं। इन हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को ताउम्र अपनी अजीजों को खोने का दंश भुगतना पड़ता है। बीते दिनों जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए हादसों में पांच लोगों ने दम तोड़ दिया था। हाल के दिनों में शहर के सरकुलर रोड पर ट्रक की चपेट में आकर दो लोगों की मौत हो चुकी है। गोण्डा। जिले में पिछले अगस्त माह के पहले सप्ताह में ही इटियाथोक थाना क्षेत्र में बेलवा बहुता के रेहरा मजरे में नहर बोलेरो पलटने से एक ही परिवार के 10 लोगों समेत एक दर्जन जिंदगियां असमय काल का शिकार बन गई थीं।

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इसके बाद घटना स्थल पर संकेतक बोर्ड, रिफलेक्टर व गति अवरोधक बना दिया। इसके अलावा जिले में कई स्थान हैं जहां हमेशा हादसे होते रहते हैं। इस वर्ष अगस्त माह तक 310 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें 207 लोगों ने जिंदगी गंवा दी फिर भी खतरनाक स्थानों पर बचाव के इंतजाम नहीं हो पाए। जिले में नई सड़कें बनने के बाद उनकी देखरेख न होने व झाड़ियों न काटे जाने से खतरनाक स्थल तेजी से बढ़े है, जहां गति अवरोधक व सांकेतिक बोर्ड समेत अन्य इंतजाम होने चाहिए। कटरा बाजार-गोंडा मार्ग पर अशोकपुर अंधेमोड पर वाहन आपस में टकराकर रेलिंग तोड़ चुके हैं। हिन्दुस्तान बोले गोंडा मुहिम के तहत आयोजित संवाद में लोगों ने कहा कि आए दिन हादसों में जिंदगियां खत्म होने के बाद भी वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं। लोगों ने कहा कि शहर में अतिक्रमण के चलते सड़कें संकरी हो चुकी हैं। तमाम चालक लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाकर लोगों की जान जोखिम में डाल देते हैं। बाइकों पर बिना हेलमेट लगाए ट्रिपलिंग करना आम बात हैं। इन दिनों नो हेलमेट नो पेट्रोल अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन इसके तहत भी सिर्फ कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। अधिकांश पंपों पर बिना हेलमेट बाइक सवार धड़ल्ले से पेट्रोल भरवा रहे हैं। यह बात दीगर है कि सरकारी अफसर आंकड़ों में अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। ब्लैक स्पॉट घोषित करने में होती है देरी जिले में कई बार सड़क हादसे होने के बाद भी ब्लैक स्पॉट घोषित करने की प्रक्रिया में देरी होती है। अफसरों का कहना है कि सड़क सुरक्षा के मानकों के मुताबिक किसी खास जगह हादसे होने पर उसे ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है। जिले में हर साल सड़क हादसों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है लेकिन इसके बाद भी सड़क हादसों की बढ़ती संख्या इस जागरूकता अभियान को मुंह चिढ़ा रही है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार सिर्फ कागजी कोरम पूरा करने में जुटे रहते हैं। अनाधिकृत कट और मोड़ बन रहे हादसे का कारण गोंडा-लखनऊ हाईवे बनने से जहां लोगों ने यात्रा आसान हुई वहीं इसके किनारे रह रहे लोगों ने लोगों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से अवैध कट बना लिए हैं। ये कट दुर्घटना को बढ़ावा दे रहे हैं। लोगों ने कहा कि हाइवे पर यह कट और विपरीत दिशा में फर्राटा भरते वाहन राहगीरों की जिंदगी ही निगल जा रहे है। शहर में महाराजा अग्रसेन चौराहा से करनैलगंज तक डिवाइडर पर कई अनाधिकृत कट जान के दुश्मन बने हैं। लोगों ने कहा कि शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जब हाईवे पर हादसा न होता हो। जिस पर जिला प्रशासन के साथ हाइवे के अधिकारियों की आंखें बंद नजर आती हैं। इन बिना मानक के खुले कट को बंद करने के लिए संबंधित अधिकारी कोई ठोस कदम नही उठा रहे हैं। यही नहीं शहर में विपरीत दिशा में दौड़ते वाहन, वाहनों की तेजगति, सड़क के दोनों ओर स्थित दुकानों और रिहायशी मकानों के बाहर अतिक्रमण हादसों की मुख्य वजह हैं। लोग अपने घर के सामने चार पहिया वाहन हाइवे पर ही खड़ा करते हैं। जिससे रात में राहगीरों को काफी दिक्कत आती है। हथियागढ मोकलपुर सम्पर्क मार्ग, घारीघाट भिरवा सम्पर्क मार्ग, गिन्नी-नगर अल्लीपुर मार्ग, अल्लीपुर घनश्यामपुर ग्रंट मार्ग, गौरा चौकी हर्रैयाघाट मार्ग,नेतौरी मकोइया मार्ग सहित कई सड़के जगह-जगह टूटकर बड़े बड़े गढ्ढों में तब्दील हो गई है। जिससे बरसात का पानी इन गढ्ढो में भर जाता है। ऐसे में इन रास्तों से गुजरने वाले राहगीर इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीण इनको सही कराने के लिए जिम्मेदारों से गुहार भी लगा चुके हैं। फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। सड़कें टूटी होने से भी होते हैं हादसे जिले में गोण्डा-लखनऊ हाईवे सहित अन्य मार्गों पर अंधा मोड़ व कट की गलत डिजाइन और प्रवर्तन की कार्रवाई में कमी हादसों की बड़ी वजह है। लोगों ने कहा कि नो हेलमेट, नो पेट्रोल अभियान के तहत सिर्फ खानापूरी होती है। जिले में कई ऐसी सड़के हैं जो पूरी तरह से टूटी फूटी हैं। इन टूटी सड़कों की वजह से भी अक्सर दुर्घटना होती है। ग्रामीण क्षेत्रों की कई सड़के जगह-जगह टूटकर गढ्ढों में तब्दील हो गयी है। बारिश की वजह से जलभराव की स्थिति बनी रहती है। इसी वजह से आए दिन राहगीर गिर कर चोटिल हो रहे हैं। प्रस्तुति: सच्चिदानंद शुक्ल/रंजीत तिवारी। फोटो: पंकज तिवारी पिंटू बोले लोग --------------- जिले में रोज सड़क दुर्घटनाएं हो रही है पर जिम्मेदार इसको लेकर पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं। अफसरों को ध्यान देने की जरूरत है। -अशोक नारायण शुक्ल शहर से लेकर गांव तक सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है। हादसों में कमी लाने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। -रुद्र प्रसाद मिश्रा जिले में सड़क हादसों की वजह से कई परिवारों में कमाऊ सदस्य ही नहीं बचे। ऐसे परिवारों की व्यथा कोई नहीं समझ सकता है। -पप्पू शुक्ला जिले में सड़क हादसों में कमी लाने को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस विभाग को लापरवाही बरतने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। -लल्लू सिंह बोले जिम्मेदार ------------- जिलेभर में नियमित तौर पर यातायात नियमों के पालन के लिए चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इस दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर चालान भी किया जाता है। सड़कों पर सुखद और सुरक्षित यात्रा के लिए सभी लोग निर्धारित गति सीमा में चलने के साथ यातायात नियमों का पालन करें। इस संबंध में समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। -विनीत जायसवाल, एसपी