बोले गोण्डा: सर्दी कम होते ही गोण्डा में तेजी से बढ़ने लगा मच्छरों का प्रकोप
Gonda News - ठंड कम होते ही गोण्डा जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू और अन्य मच्छर जनित बीमारियों के मामलों में वृद्धि हो रही है। नागरिकों ने साफ-सफाई और फॉगिंग की मांग की है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। खराब सफाई व्यवस्था के कारण मच्छरों का प्रकोप और बढ़ रहा है।

ठंड घटने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। जिले में पिछले वर्षों में डेंगू के बढ़ते मामलों और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खराब साफ-सफाई व्यवस्था हालात को और गंभीर बना रही है। कई कालोनियों में नालियां बजबजा रही हैं, खुले नालों से उठती दुर्गध और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोग नियमित सफाई और फॉगिंग की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हाल के वर्षों में मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार डेंगू के मरीजों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।
वर्ष 2020 में 17 मरीज मिले थे, जो 2021 में बढ़कर 137 और 2022 में 188 पहुंच गए। वर्ष 2022 में एईएस के 51, जेई के तीन, मलेरिया के 13, चिकनगुनिया के चार और स्क्रब टाइफस के पांच मामले दर्ज किए गए। 2021 में डेंगू के 137 और 2020 में 17 मामले सामने आए थे। हिंदुस्तान बोले गोण्डा मुहिम में लोगों ने मच्छर जनित रोगों से निजात दिलाने की मांग उठाई है। बोले गोण्डा: सर्दी कम होते ही गोण्डा में तेजी से बढ़ने लगा मच्छरों का प्रकोप गोण्डा। मौसम में गर्माहट बढ़ते ही शहर और ग्रामीण इलाकों में मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है। हालात यह हैं कि शाम होते ही मच्छरों के झुंड लोगों का जीना मुहाल कर दे रहे हैं।हिन्दुस्तान के बोले गोंडा मुहिम से आए शिवा,रीना और जामवंती समेत कई नागरिकों ने नगर पालिका परिषद, जिला पंचायत राज अधिकारी और संबंधित ब्लॉकों से तत्काल फागिंग शुरू कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अब तक न तो नगर पालिका और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस कदम उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाले-नालियों की नियमित सफाई न होने से उनमें गंदा पानी जमा है, जो मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बन रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ मच्छरों का हमला भी तेज हो गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। नागरिकों ने मांग की है कि साफ-सफाई अभियान के साथ नाले-नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव और नियमित फागिंग कराई जाए। लोगों का यह भी कहना है कि बिजली की बढ़ती मांग के चलते जब पंखे और कूलर बंद हो जाते हैं, तब मच्छरों का प्रकोप और बढ़ जाता है। कई परिवारों को पूरी-पूरी रात जागकर बितानी पड़ रही है। ग्रामीण इलाकों में बदहाल सफाई व्यवस्था : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। स्वच्छता के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद गांवों में गंदगी का अंबार लगा है। नालियों में कचरा भरा पड़ा है, कई स्थानों पर नालियां टूटी-फूटी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बहता व जमा रहता है। इससे न केवल आवागमन में परेशानी हो रही है, बल्कि मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। झंझरी ब्लॉक के बूढादेवर,इमिलिया गुरुदयाल, गिर्द गोण्डा समेत कई गांवों में हालात बदतर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं कराई जाती। कचरा समय पर नहीं उठाया जाता, जिससे वह नालियों में फंसकर जलनिकासी व्यवस्था को बाधित कर देता है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है और कीचड़युक्त हालात बन जाते हैं। गांवों की सड़कों पर जमा गंदा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों में खासतौर पर संक्रमण का खतरा अधिक बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ स्थानों पर सफाई कर्मी महीनों से नजर नहीं आए। वहीं, पंचायत स्तर पर भी निगरानी और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित सफाई, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था और जागरूकता अभियान चलाकर ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही टूटी नालियों की मरम्मत और कचरा निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था बेहद जरूरी है। बारिश में मोहल्लों में होता जलभराव, बढ़ती हैं दिक्कत शहर के कई मोहल्लों में बारिश का मौसम आते ही लोगों के लिए आफत हो जाती है। हल्की से मध्यम बारिश के बाद ही सड़कों और गलियों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि मोहल्ले से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। दो महीने के बरसाती दिनों में स्थिति और अधिक दयनीय बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर वर्ष यही समस्या दोहराई जाती है। कई वार्डों में नालियां या तो जाम हैं या फिर अधूरी बनी हुई हैं। अधिकांश घरों के सामने गंदा पानी बहता रहता है, जिससे लोगों को दरवाजे से निकलना भी दुश्वार हो जाता है। खुली नालियों में जमा पानी से दुर्गध फैल रही है। इससे न केवल वातावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित रोगों का खतरा लोगों को सता रहा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कई कॉलोनियों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां खाली पड़े प्लॉटों में लोगों ने नालियों का पानी मोड़ रखा है। इन स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है और जलभराव स्थायी समस्या बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग को शिकायतें दी गई, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। फॉगिंग शुरू न होने से बढ़ा संकट, लोग हो रहे परेशान नगर पालिका क्षेत्र में अब तक फॉगिंग कार्य शुरू न होने से मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। हिन्दुस्तान के बोले गोण्डा मुहिम से जुड़े लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में नाले-नालियों की नियमित सफाई कराने की मांग उठाई है। वहीं नगर क्षेत्र के काशीराम कॉलोनी, उपरहितन पुरवा, आवास विकास कॉलोनी, पटेल नगर, घोषियाना और गायत्रीपुरम सहित कई मोहल्लों के निवासियों ने नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक फॉगिंग नहीं कराई गई है। नालों और नालियों की नियमित सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से जगह-जगह गंदगी जमा है, जिससे मच्छरों को पनपने का अनुकूल वातावरण मिल रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। गत वर्ष मलेरिया और डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 हजार से अधिक लोगों की जांच में लगभग एक हजार से ज्यादा मरीज मलेरिया से पीड़ित पाए गए थे। इसके बाद भी स्थिति जस की तस है। इनकी भी सुनिए कालोनी में खुली नालियां समस्या बनी हुई हैं। इस पर ढक्कन लगाने की आवश्यकता हैं। नालियों की सफाई होती हैं। - दिनेश चतुर्वेदी शहरी क्षेत्र में नालों पर ढक्कन लगाने की आवश्यकता है, नालों पर ढक्कन लगवाए। - हामिद अली सकरी गली होने की वजह से लोगों को समस्या होती हैं। जलनिकासी व्यवस्था होगी तो मच्छरों से निजात मिलेगी। - नंद किशोर तिवारी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बनी नालियां बजती रहती हैं। नियमित साफ सफाई नहीं होती है। - अनूप पांडेय मोहल्लों और कॉलोनी में बने नालियों से अतिक्रमण को हटाने की आवश्यकता है। - अशोक मिश्रा कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां नालिया खुली हुई है इसकी वजह से दुर्गध आती है। - काली तिवारी बोले जिम्मेदार नालियों की बराबर साफ-सफाई कराई जाती है। जलभराव की शिकायत पर जलनिकासी की भी व्यवस्था कराई जाती है। वार्डों में मच्छरों के प्रकोप से छुटकारा दिलाने के लिए फागिंग भी कराई जाती है। लोगों को समस्याओं से निजात दिलाने के लिए सभी प्रयास किए जाते हैं। -विशाल कुमार, प्रभारी ईओ/एएसडीएम
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