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गोण्डा-प्रकृति की गोद में किसानों के लिए संजीवनी है अरंगा-पार्वती झील

हिन्दुस्तान टीम,गोंडाNewswrap
Wed, 01 Dec 2021 06:15 PM
गोण्डा-प्रकृति की गोद में किसानों के लिए संजीवनी है अरंगा-पार्वती झील

वजीरगंज।

टिकरी जंगल की सीमा स्थित अरंगा-पार्वती झील प्राकृतिक छटा का नायाब नमूना है। पर्यटन की अपार संभावनाओं को समेटे इस झील को जीर्णोद्धार की दरकार है। ठंड का अहसास होते ही यहां मेहमान पक्षियों के कलरव का विहंगम दृश्य देखने के लिए प्रदेश के कोने-कोने से प्रकृति प्रेमी लग्जरी गाड़ियों से पहुंचते हैं। प्रकृति की गोद में सेल्फी लेकर यहां के पर्यटन को यादगार बनाते हैं।

अरंगा-पार्वती झील पवित्र नगरी अयोध्या के सरयू नदी का संगम है। इस झील में सरयू व टेढ़ी नदी का पानी एकत्र होता है। टेढ़ी नदी की पानी को संग्रहित करने वाला यह झील जल संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है। 1047 हेक्टेयर में फैली झील का अनुपयोगी पानी किसानों के फसलों की सिंचाई के लिए मुफीद है। अयोध्या से सटा होने से यह देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

झील की भौतिक स्थिति : अरंगा-पार्वती झील का जल ग्रहण क्षेत्र दो किमी चौड़ा और लंबाई लगभग आठ किमी है। वर्ष 2012 में सुंदरीकरण की कवायद शुरू हुई। तत्कालीन कृषि मंत्री राजा आंनद सिंह के प्रयास से झील का कायाकल्प हुआ था।

सदाबहारी है यहां की अनुपम छटा : अरंगा-पार्वती झील पर्यटन की दृष्टि से भी अपना विशेष स्थान रखता है। सर्दी हो या गर्मी, सभी मौसम में यहां स्थानीय पर्यटकों की आमद बराबर बनी रहती है। प्रकृति की अनुपम छटा को समेटे यह झील जंगल से सटे मनोरम दृश्य को लोग कैमरे में कैद करना व सेल्फी लेना नहीं भूलते हैं। सर्दियों में विदेशी पक्षियों का प्रवास इसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लग्जरी गाड़ियों से लोग यहां पहुंचते हैं।

सुंदरीकरण की दरकार : झील के किनारे तीन दशक पहले ईंट खड़ंजा लगा था जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। सड़क मरम्मत योग्य है। झील पर सेल्फी प्वाइंट बनाए जाने की जरूरत है, जिससे आसानी से इस विहंगम दृश्य को लोग कैमरे में कैद कर सकें। पथ प्रकाश के लिए लगे खंभे पर बल्ब नहीं हैं। सिल्ट सफाई न होने से झील के किनारों पर झाड़ियां उग आईं हैं। सदस्य विधान परिषद रणविजय सिंह का कहना है कि पर्यटन सरकार की पहली प्राथमिकता में है। झील को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए शासन से मांग की गई है।

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