बोले गोण्डा : औद्यानिक फसलों पर सब्सिडी बढ़े तो मिले किसानों को लाभ
Gonda News - गोंडा जिले में किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फल और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, भंडारण की कमी के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए तो किसान वर्षभर औद्यानिक फसलों की खेती कर सकते हैं।

जिले में औद्यानिक फसलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बनती जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक जिले के किसान तेजी से पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फल, सब्जी, मसाला और फूलों की खेती का रुख कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 4750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की खेती से 23750 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। वहीं, केले की खेती 432 हेक्टेयर भूमि पर हो रही है। गोण्डा। जिले में खेती की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। कभी धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों की खेती करने वाले तमाम किसान सब्जी और फल उत्पादन करने में जुटे हैं।
जिले के सैकड़ों किसान केला, पपीता, आम के साथ-साथ स्ट्रॉबेरी जैसी लाभकारी फसलों की खेती कर रहे हैं। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों का कहना है कि सब्जी और फलों की खेती कम समय में बेहतर आमदनी देती है। टमाटर, मिर्च, भिंडी, बैगन, लौकी जैसी सब्जियों की खेती से किसानों को साल भर नियमित आय मिल रही है। वहीं केले और पपीते की खेती एक से दो वर्ष में ही अच्छा लाभ देने लगी है। आम की उन्नत किस्मों के बागानों से दीर्घकालीन आय का मजबूत साधन तैयार हो रहा है। खास बात यह है कि जिले में कुछ प्रगतिशील किसानों ने आधुनिक तकनीक, मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई के सहारे स्ट्रॉबेरी की खेती भी शुरू की है। पहले इसकी खेती पहाड़ी और ठंडे क्षेत्रों तक सीमित मानी जाती थी। स्थानीय बाजार के साथ-साथ बाहर के जिलों में भी इन फसलों की मांग बढ़ रही है। भंडारण के अभाव में किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान जिले में फल, सब्जी और फूलों के भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। समय पर भंडारण और विपणन की सुविधा न मिलने के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है। यही वजह है कि अच्छी पैदावार के बावजूद लाभ नहीं मिल पा रहा है। कम समय में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना के कारण यह औद्यानिक फसलों की खेती किसानों को लुभा रही है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि जिले में सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो किसान वर्षभर औद्यानिक फसलों की खेती कर सकते हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों से पानी की बचत के साथ उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। वहीं, कोल्ड स्टोरेज और भंडारण केंद्रों की स्थापना से किसानों को राहत मिलेगी। नवाबगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत खरगूपुर में किसानों की मेहनत और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और मजबूती मिली है। यहां परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए किसानों ने फूलों की खेती को अपनाया, तो वहीं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने फूलों से माला निर्माण कर आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल पेश की है। ग्राम सभा खरगूपुर में जय श्री रामेश्वर नाथ स्वयं सहायता समूह एवं स्वयं सहायता समूह बालाजी की महिलाएं स्थानीय किसानों द्वारा उगाए गए फूलों से विभिन्न प्रकार की मालाएं तैयार कर रही हैं। शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक व संगठनात्मक कार्यक्रमों तथा पारिवारिक समारोहों में आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग साइज और संख्या में मालाएं बनाकर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे जहां किसानों के फूलों की स्थानीय स्तर पर अच्छी खपत हो रही है। समूह की महिलाओं को नियमित रोजगार भी मिल रहा है। माला निर्माण के इस कार्य में समूह की बहनों के साथ उनके गार्जियन पिंटू, प्रकाश और आशीष भी सहयोग कर रहे हैं। उनकी सहभागिता से कार्य की गुणवत्ता बनी रहती है और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि गांव में रहकर भी रोजगार और आय के स्थायी साधन विकसित किए जा सकते हैं। दीपावली पर्व के दौरान गेंदा फूल की मांग बढ़ने से किसानों को अच्छे दाम मिले। किसानों के अनुसार इस बार दीपावली पर गेंदा फूल की कीमत लगभग दस हजार रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गई, जिससे उन्हें लाखों रुपये की कमाई हुई। प्रगतिशील किसान शारदा कांत पांडेय ने बताया कि उनके गांव में आधा दर्जन किसान गेंदा फूल की खेती कर रहे हैं। कहा कि गेंदा की खेती कम लागत में तैयार हो जाती है और कम समय में फसल तैयार होने से किसानों को शीघ्र लाभ मिलता है। धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और त्योहारों में गेंदा फूल की सालभर मांग बनी रहती है। किसानों का कहना है कि धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों की तुलना में फूलों की खेती अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है। स्थानीय बाजार में ही बिक्री होने से परिवहन का खर्च भी नहीं लगता। आसपास के जिलों से व्यापारी भी खरगूपुर पहुंचकर फूल खरीद रहे हैं। वजीरगंज ब्लॉक सब्जी उत्पादन में अव्वल रहा जिले के वजीरगंज ब्लॉक ने सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है। यहां के किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए सब्जी की उन्नत खेती को अपनाकर बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। वजीरगंज क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु सब्जी उत्पादन के लिए काफी मुफीद मानी जाती है, जिसका लाभ यहां के किसान बखूबी उठा रहे हैं। क्षेत्र में टमाटर, आलू, गोभी, फूलगोभी, बैंगन, मिर्च, लौकी, कद्दू और भिंडी सहित कई प्रकार की सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। किसान एक ही वर्ष में कई फसलें लेकर अपनी आय को दोगुना करने में सफल हो रहे हैं। सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों का कहना है कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब अन्य किसान भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी वजीरगंज की सब्जियों की अच्छी मांग है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। प्रस्तुति: सच्चिदानंद शुक्ल/आलोक ओझा बोले किसान --------------- अपने गांव में पांच एकड़ भूमि पर फूलों की खेती करा रहा हूं। इसके लिए अच्छा मुनाफा हो रहा है। दिवाली पर गेंदा फूल की काफी मांग थी। -शारदा कांत पांडे सब्जी खेती करने वाले किसानों को सब्सिडी पर बीज की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है। अधिकांश को बीज नहीं मिल पाता हैं। -सत्य प्रकाश तिवारी वजीरगंज क्षेत्र में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए मंडी बनाई जाए। मंडी न होने से किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। -राजू मौर्य किसानों को उन्नत किस्म के बीज सस्ते दरों पर मिलना चाहिए इससे उत्पादन और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। -बसंत शुक्ला बोले जिम्मेदार ------------- उद्यान विभाग किसानों को उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध करा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों, ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक विधि से फसल प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। किसानों को रियायती दरों पर बीज, पौध और तकनीकी सहायता मिल रही है। -रश्मि शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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