बोले गोण्डा-सब्जी और फल भंडारण की व्यवस्था नहीं,किसान परेशान

Feb 19, 2026 05:06 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोंडा
share

Gonda News - गोंडा जिले में खरीफ और रबी सीजन में विभिन्न फसलों की बुवाई हुई है, लेकिन हरी सब्जियों के उचित भंडारण की कमी से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आलू के लिए केवल एक कोल्ड स्टोरेज है, जो अपर्याप्त है। किसान आधुनिक कोल्ड स्टोरेज की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

बोले गोण्डा-सब्जी और फल भंडारण की  व्यवस्था नहीं,किसान परेशान

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में खरीफ सीजन में धान 1.24 लाख हेक्टेयर, मक्का 45 हजार हेक्टेयर में बोया गया था। रबी सीजन में गेहूं 1.41 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। वहीं, उत्पादन वर्ष 2025-26 में आम 4,750 हेक्टेयर में 23,750 मीट्रिक टन, केला 432 हेक्टेयर में 8,640 मीट्रिक टन और आलू 2,580 हेक्टेयर में 51,600 मीट्रिक टन उत्पादित हुआ। इसके अलावा टमाटर, फूलगोभी और पत्ता गोभी का उत्पादन भी हजारों मीट्रिक टन में हो रहा है। अनाज भंडारण के लिए जिले में एफसीआई के तहत 1,59,840 मीट्रिक टन क्षमता उपलब्ध है, लेकिन हरी सब्जियों के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं है।

आलू के लिए भगोहर स्थित सदगुरुदेव कोल्ड स्टोर में 1.32 लाख बोरों क्षमता है जो पर्याप्त नहीं मानी जा रही। हिन्दुस्तान बोले गोण्डा मुहिम में किसानों ने मांग उठाई है कि जिले में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएं और सब्जियों को जरूरत के अनुसार अन्य जिलों में भेजने की व्यवस्था हो। ण्डा। कृषि क्षेत्र में जिले की स्थिति बेहतर है लेकिन इसके बाद भी किसानों को उपज का लाभ कम मिलता है। जिले में अनाज और फल-सब्जी समेत विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। जिले में सब्जी किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। यह स्थिति सब्जियों के भंडारण करने की उचित व्यवस्था न होने से पैदा होती है। इसकी वजह से किसानों को अपनी मेहनत के मुताबिक लाभ नहीं मिलता है। हालांकि, जिले में अनाज के भंडारण की व्यवस्था हैं। भंडारण की समस्या सबसे अधिक सब्जी और फल उत्पादकों के सामने है। सब्जियां और फल जल्दी खराब होने वाली उपज है। अगर किसान इनका भंडारण नहीं कर पाता तो उसे मजबूरी में तत्काल बेचने के लिए मंडी का रुख करना पड़ता है। इस दौरान मंडी व्यापारी इसका फायदा उठाते हुए बेहद कम कीमत देते हैं। तरबगंज के किसान विनोद तिवारी का कहना है। सरकार जिले में हरी सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाए। जिले में फल और सब्जियों की खेती का विस्तार: जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान फल एवं सब्जी की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार आम 4,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाया जा रहा है, जिससे 23,750 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। केला 432 हेक्टेयर में 8,640 मीट्रिक टन और अमरूद 125 हेक्टेयर में 750 मीट्रिक टन उत्पादन दे रहा है। कटहल, पपीता और नींबू वर्गीय फसलों की खेती भी जिले में की जा रही है। अगर आलू की बात करें तो जिले में 2,580 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस बार खेती हुई है। जिले में लगभग 51,600 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। टमाटर 300 हेक्टेयर में 4,800 मीट्रिक टन, फूलगोभी 230 हेक्टेयर में 4,370 मीट्रिक टन, पत्ता गोभी 220 हेक्टेयर में 3,960 मीट्रिक टन और मिर्च 135 हेक्टेयर में 810 मीट्रिक टन उत्पादन दे रही है। इसके अलावा लौकी, कद्दू, तरोई, बैंगन, भिंडी और प्याज की खेती भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा ने बताया कि विविधीकरण को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। फल एवं सब्जी उत्पादन में वृद्धि से स्थानीय बाजार के साथ-साथ बाहरी मंडियों में भी आपूर्ति सुदृढ़ हुई है। इससे किसानों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं। जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर मुआवजे की मांग: जिले में किसानों की फसलें इन दिनों जंगली जानवरों, छुट्टा मवेशियों के झुंड और बंदरों के कारण भारी नुकसान झेल रही हैं। खेतों में तैयार खड़ी गेहूं, सरसों और सब्जी की फसलों को रात के समय सबसे अधिक क्षति पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत और लागत लगाने के बाद भी उपज सुरक्षित नहीं रह पा रही है, जिससे आर्थिक संकट गहरा रहा है। भाकियू जिलाध्यक्ष शिवराम उपाध्याय ने प्रशासन से मांग की है कि जिन किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं, उन्हें तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाएं और छुट्टा मवेशियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन किया जाएगा, हमारी मांगों को सुने और जल्द ही उनका समाधान करें। वजीरगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होती हैं आलू की खेती वजीरगंज क्षेत्र के कस्बा, चंदापुर, भगोहर, कोडंर, मझारा, गेडसर, पूरेडाढू, मोहनपुर, कोठा, ढोढियापारा, बलेश्वरगंज, कादीपुर, भटपुरवा, चनहा, अजबनगर, करदा, चडौवा और परसापुर महडौर सहित कई गांवों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इससे हजारों किसान जुड़े हैं। किसानों का कहना है कि लागत और मेहनत के अनुरूप दाम नहीं मिल पाता, हालांकि कुछ किसानों को अच्छा मुनाफा भी होता है। भगोहर स्थित सदगुरुदेव कोल्ड स्टोर में आलू का भंडारण किया जाता है। प्रबंधक भरत मिश्रा के अनुसार यहां 1 लाख 32 हजार बोरा आलू भंडारण की क्षमता है।वजीरगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती: वजीरगंज क्षेत्र के कस्बा, चंदापुर, भगोहर, कोडंर, मझारा, गेडसर, पूरेडाढू, मोहनपुर, कोठा, ढोढियापारा, बलेश्वरगंज, कादीपुर, भटपुरवा, चनहा, अजबनगर, करदा, चडौवा और परसापुर महडौर सहित कई गांवों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इससे हजारों किसान जुड़े हैं। किसानों का कहना है कि लागत और मेहनत के अनुरूप दाम नहीं मिल पाता, हालांकि कुछ किसानों को अच्छा मुनाफा भी होता है। भगोहर स्थित सदगुरुदेव कोल्ड स्टोर में आलू का भंडारण किया जाता है। प्रबंधक भरत मिश्रा के अनुसार यहां 1 लाख 32 हजार बोरा आलू भंडारण की क्षमता है। हरी सब्जियों के भंडारण की व्यवस्था नहीं जिले में हरी सब्जियों के संरक्षण की कोई उचित व्यवस्था न होने से किसानों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से टमाटर और प्याज जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज या भंडारण केंद्र नहीं होने की वजह से किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है। कई बार मंडियों में उचित दाम न मिलने पर सब्जियां सड़ जाती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। जिले में आलू के लिए सिर्फ एक मात्र कोल्ड स्टोरेज वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र में संचालित है, जो क्षमता के मुकाबले अपर्याप्त साबित हो रहा है। वहीं, सब्जी उत्पादक किसान अधिक संख्या में होने के बावजूद जिले में हरी सब्जियों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई पहल नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि यदि जिले में सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज या सब्जियों की प्रोसेसिंग यूनिट की व्यवस्था हो जाए तो उन्हें उचित लाभ मिल सकेगा। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि सब्जियों की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी। जिले में उपज की विविधता पर भंडारण नदारद: जिले में गेहूं, धान और मक्का प्रमुख फसलें हैं। तराई क्षेत्र होने के कारण यहां की मिट्टी उपजाऊ है और सिंचाई की पर्याप्त सुविधा होने से उत्पादन भी बढ़िया होता है। वजीरगंज, करनैलगंज और तरबगंज ब्लॉक में आलू, गोभी, मिर्च, लौकी, टिंडा, बैंगन जैसी हरी सब्जियों की खेती व्यापक स्तर पर होती है। मनकापुर तहसील में आम के बागान हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर भंडारण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसानों को या तो औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ती है। जिले में 1.59 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण क्षमता जिले में अनाज भंडारण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए चार प्रमुख डिपो स्थापित किए गए हैं, जिनका संचालन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा किया जा रहा है। इनमें दो सरकारी और दो निजी क्षेत्र के अंतर्गत संचालित डिपो शामिल हैं। जिले में कुल भंडारण क्षमता 1,59,840 मीट्रिक टन है। इसमें एफएसडी गोण्डा की 34,500 मीट्रिक टन, एसडब्ल्यूसी गोण्डा की 13,340 मीट्रिक टन तथा पीईजी गोण्डा ए, बी, सी, कटरा और बसंतपुर सहित अन्य गोदाम शामिल हैं। डिप्टी आरएमओ एनके पाठक ने बताया कि एफएसडी डिपो कचहरी रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। पीईजी डिपो हारीपुर और कटरा में बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त एसडब्ल्यूसी डिपो भी भंडारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। तीन डिपो में मुख्य रूप से गेहूं और चावल का भंडारण किया जाता है। एसडब्ल्यूसी डिपो में सामान्यतः मक्का रखा जाता है। मक्का सीजन न होने पर वहां चावल भी संग्रहित किया जाता है। इस व्यवस्था से किसानों को समय पर भुगतान, अनाज की सुरक्षित रखरखाव और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। प्रस्तुति: सच्चिदानंद शुक्ल/आलोक ओझा फोटो: पंकज तिवारी पिंटू बोले लोग जैविक खादों को कम दामों में सब्जी किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे खेती में सुविधा होगी। - यासीन मोहम्मद सब्जी के मंहगे बीज को सस्ती कीमत पर किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। -राम कुमार जिले में महिलाएं भी सब्जी खेती कार्य करती है। सब्जी मंडी में इन महिला किसानों के लिए कोई सुविधा नहीं है। - राजा चौहान किसानों को फसल बीमा लाभ देने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। कैंप लगाकर फसल बीमा योजना से किसानों को जोड़े। - सौरभ सिंह बोले जिम्मेदार जिले में सब्जी किसानों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान विभाग में आकर पंजीकरण करा सकते हैं। सब्जी किसानों के लिए तीन योजनाएं चलाई जा रही हैं। -रश्मि शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।