वंदे मातरम गीत मातृभूमि की वंदना और नागरिक कर्तव्य का प्रतीक : बावन
Gonda News - भाजपा विधायक बावन सिंह ने कहा कि वंदे मातरम गीत मातृभूमि की वंदना और नागरिक कर्तव्य का प्रतीक है। उन्होंने इस गीत को 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह गीत देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को पुनर्संचार करता है। विद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में सामूहिक गायन का आयोजन किया जाएगा।

गोण्डा, संवाददाता। भाजपा विधायक बावन सिंह ने कहा कि वंदे मातरम गीत मातृभूमि की वंदना और नागरिक कर्तव्य का प्रतीक है। वन्दे मातरम् केवल शब्द नहीं, यह भारतीय अस्मिता का घोष है। 150 वर्ष बाद भी इसकी गूंज हमारे हृदय में उतनी ही प्रखर है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में थी। यह गीत देशभर में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का पुनर्संचार करता है। वन्दे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधायक कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से रुबरु थे। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष सूर्य नारायण तिवारी अभियान संयोजक उपाध्यक्ष नीरज मौर्य, दीपक अग्रवाल व मीडिया प्रभारी राघवेंद्र ओझा पट्टू उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि यह गीत लाखों देशभक्तों के हृदय में जोश, समर्पण और स्वाभिमान की लौ जलाता रहा। आज, जब इस अमर गीत को 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, हम उस राष्ट्रीय चेतना को पुनः जाग्रत करने का संकल्प ले रहे हैं। बताया कि यह गीत बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में लिखा गया। 1882 में आनंदमठ उपन्यास में सम्मिलित हुआ। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में राष्ट्रीय नारा बना।1947 में संविधान सभा ने इसे “राष्ट्रीय गीत” का दर्जा दिया। 1875-2025: इस काल में वन्दे मातरम् ने स्वाधीनता, एकता और राष्ट्रीय गर्व की भावना को जीवित रखा। बताया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में सामूहिक गायन सहित निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा।प्रदर्शनी, संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से गीत के इतिहास का प्रदर्शन जिले भर मे आयोजित किये जायेंगे। इस दौरान राजेश राय चंदानी, संदीप पाण्डेय, अंजू सिंह खरवार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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