भ्रष्टाचार में कड़ा ऐक्शन, शिक्षा विभाग के डीसी को भेजा जेल, सीएमओ का ऑपरेटर गिरफ्तार
गोंडा में 15 करोड़ के डेस्क-बेंच टेंडर में घूसखोरी में बेसिक शिक्षा विभाग के डीसी (निर्माण) विद्याभूषण मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उधर सोनभद्र में सीएमओ कार्यालय में संविदा पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है।

UP News: गोंडा जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले और घूसखोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। नगर कोतवाली पुलिस ने विभाग के जिला समन्वयक (DC निर्माण) विद्याभूषण मिश्रा को धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद से शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सोनभद्र में सीएमओ कार्यालय में संविदा पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
भ्रष्टाचार का यह खेल डेस्क-बेंच की आपूर्ति के लिए जारी किए गए 15 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा है। नीमन सीटिंग सॉल्यूशन फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) ने आरोप लगाया था कि बेसिक शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने टेंडर दिलाने के नाम पर कुल राशि का 15 प्रतिशत कमीशन मांगा था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों को 26 लाख रुपये की रिश्वत एडवांस के तौर पर दी थी। इसके बावजूद, जब अधिकारियों की ओर से और अधिक रुपयों की मांग की गई और फर्म ने इसे देने से इनकार कर दिया, तो अधिकारियों ने प्रतिशोध की भावना से काम करते हुए फर्म को 'ब्लैक लिस्ट' कर दिया। इतना ही नहीं, फर्म के खिलाफ झूठी एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण अदालत (एंटी करप्शन कोर्ट), गोरखपुर ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट के आदेश पर गोंडा के नगर कोतवाली में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अतुल कुमार तिवारी, डीसी (निर्माण) विद्याभूषण मिश्रा और डीसी (जीईएम) प्रेम शंकर मिश्रा के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
मंगलवार शाम को नगर कोतवाली पुलिस ने सिविल लाइन चौकी इंचार्ज और भारी पुलिस बल के साथ बीएसए कार्यालय पर छापेमारी की। पुलिस ने मौके से डीसी (निर्माण) विद्याभूषण मिश्रा को हिरासत में लिया। बुधवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। नगर कोतवाल विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले में दूसरे आरोपी डीसी (जीईएम) प्रेम शंकर मिश्रा फिलहाल वांछित हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
अन्य अफसरों पर भी लटकी तलवार
डीसी निर्माण की गिरफ्तारी के बाद अब इस घोटाले में शामिल अन्य विभागीय अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहनता से जांच की जा रही है। गिरफ्तारी टीम में दरोगा अजय कुमार तिवारी, सिपाही विनय प्रताप, संदीप कुमार और चंद्रजीत चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सीएमओ कार्यालय का ऑपरेटर घूस लेते गिरफ्तार
सोनभद्र में सीएमओ कार्यालय में संविदा पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस जारी कराने के नाम पर एक महिला से 50 हजार रुपये की मांग की थी। महिला की शिकायत पर एंटी करप्शन मिर्जापुर की टीम ने बुधवार को कार्रवाई की। मिर्जापुर की पीलीकोठी निवासी मीरा देवी ने सोनभद्र के मधुपुर में अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए आवेदन किया था।
राबर्ट्सगंज स्थित सीएमओ कार्यालय के पीएनडीटी विभाग में संविदा पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर चंचल यादव ने मीरा से लाइसेंस जारी कराने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की। महिला ने इसकी शिकायत मिर्जापुर एंटी करप्शन टीम से की। एंटी करप्शन के प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार चौरसिया के नेतृत्व में टीम ने जांच के बाद आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई।
आरोपी को रिश्वत की रकम लेने के लिए रोडवेज बस स्टैंड के पास बुलाया गया। जैसे ही आरोपी चंचल ने महिला से 50 हजार की रिश्वत ली। टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। राबर्ट्सगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच हो रही है। आरोपी काफी समय से लाइसेंस से जुड़े कार्यों में अनियमितता और निजी अस्पतालों से अवैध वसूली में संलिप्त था।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


