गोल्डी बराड़ ने गोदारा को सौंपा जिम्मा, रविंद्र ने बनाया प्लान; दिशा पाटनी के घर फायरिंग की पूरी कहानी
अनिल ने रुपये खर्च करके रविंद्र की जमानत कराई तो वह अपने मामा का दोस्त होने के कारण अनिल को भी मामा कहने लगा। उनके संबंधों में प्रगाढ़ता आ गई। पुलिस के मुताबिक दिशा पाटनी के घर फायरिंग में अनिल की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन वह भी दीपू के साथ नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। मुठभेड़ में दबोच लिया गया।

फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर हुई फायरिंग की पूरी कहानी सामने आ गई है। इस कहानी का अहम किरदार मुख्य शूटर रविंद्र है। रोहित गोदारा से इशारा मिलने के बाद रविंद्र ने ही सारी कड़ियां जोड़ीं, जिसमें शराब तस्कर अनिल ने अहम भूमिका निभाई। उसने ही रामनिवास उर्फ अनिल को इस वारदात में शामिल किया।
रामनिवास उर्फ दीपक उर्फ दीपू और अनिल से पुलिस ने पूछताछ की तो इस कांड की पूरी कहानी सामने आ गई। पता चला कि रोहित गोदारा को गोल्डी बराड़ ने इस हमले की जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस के मुताबिक अरुण और रविंद्र के बीच गहरी दोस्ती थी। अरुण पहले सोनीपत में कंटेनर की ट्रांसपोर्ट कंपनी में सुपरवाइजर का काम करता था, जिसके चलते अनिल का वहां आना-जाना था। अनिल राजस्थान और झारखंड के रास्ते बिहार में शराब की तस्करी करता था। वह अरुण के जरिये कंटेनर में जाने वाले सामान के बीच शराब छिपाकर बिहार भेजता था। दीपक कई साल तक बस और कंटेनर पर बतौर क्लीनर काम करता था, जिसके चलते उसका अरुण के पास आना-जाना था। जब कभी वह रात में कंटेनर लेकर जाता था तो अरुण से लंबी बातचीत होती थी और उनमें भी दोस्ती हो गई।
जेल गया रविंद्र तो अनिल ने की मदद
रविन्द्र करीब दो साल पहले किसी मामले में जेल चला गया। उसके पास जमानत के रुपये भी नहीं थे। रविंद्र का एक मामला भी शराब तस्करी से संबंधित था। उसने जमानत कराने में अनिल से मदद मांगी। अनिल ने रुपये खर्च करके रविंद्र की जमानत कराई तो वह अपने मामा का दोस्त होने के कारण अनिल को भी मामा कहने लगा। इसके बाद उनके संबंधों में प्रगाढ़ता आ गई। पुलिस के मुताबिक दिशा पाटनी के घर फायरिंग में अनिल की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन गैंग पर हो रही कार्रवाई के चलते वह भी दीपू के साथ नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। हालांकि मुठभेड़ में दबोच लिया गया। पूर्व में वह बिहार में शराब तस्करी में पकड़ा जा चुका है और सोनीपत से जेल भी गया है।
दीपू पर थी बाइक चुराने और रेकी की जिम्मेदारी
पुलिस के मुताबिक दीपू दस सितंबर की सुबह करीब तीन घंटे तक शूटर्स के साथ झुमका तिराहे पर रुका था और वहां यात्री शेड में सोया था। इसके बाद वह पैदल रामपुर की ओर जाते देखा गया। पूछताछ में दीपू ने बताया कि वारदात के लिए वे लोग अपनी बाइक इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे इसलिए रविंद्र ने उसे पांच सौ रुपये दे बाइक चोरी करने भेजा था। मगर बाइक न मिलने पर वह लौट आया। 11 सितंबर की सुबह फायरिंग के लिए रेकी दीपू ने ही की थी।
फेसबुक से भर्ती हुए, ब्रेन वाश किया था गोल्डी-रोहित ने
नकुल और विजय तोमर ने पूछताछ में बताया कि वे फेसबुक के माध्यम से गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा के सम्पर्क में आए थे। दोनों सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय थे। गोल्डी और रोहित ने इनका ब्रेनवाश कर फायरिंग के लिए तैयार किया। इन्हें अपने पास कनाडा बुलाने का झांसा भी दिया। जब दोनों फायरिंग के लिए तैयार हो गए तो गिरोह की तरफ से हथियार और जरूरी सामान मुहैया कराया गया। मगर पुलिस मुठभेड़ में दो साथियों के मारे जाने के बाद वे बदहवास हो गए थे और गोल्डी-रोहित गोदारा से सम्पर्क भी नहीं हो पा रहा था। फिलहाल दोनों ने पुलिस को खुद की उम्र 17 साल बताई है इसलिए पुलिस उम्र का सत्यापन कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों के परिजनों को हिरासत की सूचना दे दी है।
रविंद्र से करीबी के चलते फंसा
शराब तस्करी से अच्छी कमाई होने के चलते अनिल ने सोनीपत में वाहन मरम्मत का गैराज खोल लिया। यहां रविंद्र का आना-जाना था और अरुण भी उसके साथ ही आने लगा। रविंद्र के पास कोई वाहन नहीं था, जिसके चलते वह अनिल के पास टैक्सी से आता-जाता था। इस पर अनिल ने उसे वाहन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। बाद में अनिल उन दोनों को आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए भी वाहन उपलब्ध कराने लगा। यहीं पर अरुण के जरिये रामनिवास उर्फ दीपक उर्फ दीपू की अनिल से मुलाकात हुई।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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