जमानत राशि के फेर में 16.50 करोड़ का सोना ट्रेजरी में कैद; 6 साल पहले हत्यारोपियों से बरामद हुआ था

Feb 14, 2026 04:06 pm ISTsandeep हिन्दुस्तान, मुख्य संवाददाता, आगरा
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आगरा के 2020 सराफा दंपति हत्याकांड में बरामद 11 किलो सोना, 25 किलो चांदी और नकदी छह साल बाद भी ट्रेजरी में डबल लॉक में सुरक्षित है। वर्तमान में इसकी कीमत 16.5 करोड़ से अधिक है। कानूनी अड़चनों और भारी जमानत राशि के कारण माल रिलीज नहीं हो सका है।

जमानत राशि के फेर में 16.50 करोड़ का सोना ट्रेजरी में कैद; 6 साल पहले हत्यारोपियों से बरामद हुआ था

एक वारदात होती है। पुलिस खुलासा करती है। कोर्ट में केस चलता है। क्या-क्या मुश्किलें आती हैं परिजन क्या झेलते हैं यह पहलू पुलिस से भी अछूता रहता है। ऐसा ही एक मामला जनवरी 2020 में आगरा के शमसाबाद में हुए सराफ दंपति हत्याकांड का है। हत्यारोपियों के कब्जे से 11 किलोग्राम सोने के जेवरात, 25 किलोग्राम चांदी और 13.50 लाख रुपये बरामद हुए थे। हत्यारोपी जमानत पर बाहर हैं। बरामद माल छल साल बाद भी ट्रेजरी में डबल लॉक में रखा है। घटना के समय माल की कीमत करीब पांच करोड़ थी। वर्तमान में सोने की कीमत ही 16.50 करोड़ से अधिक है। इस माल को रिलीज कराना इतना आसान नहीं। इतनी बड़ी रकम की जमानत भी चाहिए।

62 वर्षीय मुकलेश गुप्ता और उनकी पत्नी लता गुप्ता शमसाबाद के मोहल्ला हरसहाय में रहते थे। 27 जनवरी की रात बेरहमी से दोनों की हत्या की गई थी। उन्हें करंट भी लगाया गया था। पुलिस ने पांच दिन बाद कपिल गुप्ता और ओमबाबू राठौर को गिरफ्तार करके हत्याकांड का खुलासा किया था। उस समय हुई बरामदगी आगरा पुलिस की सबसे बड़ी बरामदगी थी। पुलिस लाइन में जेवरात तौलने के लिए इलेक्ट्रानिक कांटा मंगाया गया था। जेवरातों की संख्या 35000 थी।

सूची बनाने में पूरी रात लग गई थी। दोनों हत्यारोपी जेल गए थे। वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं। मुकलेश गुप्ता की तीन बेटियां हैं। तीनों बाहर रहती हैं। माता-पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए बेटियां और रिश्तेदार ठोस पैरवी कर रहे हैं। हर बार यह सवाल उठता था कि आखिर बरामद माल रिलीज क्यों नहीं हुआ। क्या दिक्कतें आ रही हैं। पुलिस के पास इसका जवाब नहीं था।

वादी पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रत मेहरा ने बताया कि सोना-चांदी सबसे सुरक्षित जगह रखे हैं। यह केस का अहम साक्ष्य है। 11 किलोग्राम सोने की बरामदगी अपने आप में बड़ा सबूत है। इस बात पर कई बार विचार किया गया कि माल को रिलीज कराया जाए। इसमें कई कानूनी अड़चनें हैं। बरामद माल को केस में फैसला आने तक सुरक्षित रखना पड़ता है। बरामद माल को रिलीज कराने के लिए उसके बराबर रकम की अंडरटेकिंग और जमानत देनी पड़ती है।

वर्तमान में बरामद माल की कीमत साढ़े 16 करोड़ से अधिक है। इतनी बड़ी अंडरटेकिंग का इंतजाम आसान नहीं है। माल रिलीज करा भी लिया जाता तो उसे सुरक्षित रखना अपने आप में चुनौती है। कारोबारी दंपति के परिजन केस पूरी मजबूती से लड़ रहे हैं। हत्यारोपियों को सजा दिलाना चाहते हैं।

इसी के चलते यह फैसला लिया गया कि सबसे बड़े सबूत बरामद सोना-चांदी को ट्रेजरी के डबल लॉक में ही रहने दिया जाए। मुकदमे का फैसला आने के बाद इस बारे में निर्णय लेंगे। थाने का मालखाना सुरक्षित नहीं था। पूर्व में जगदीशपुरा थाने के माल खाने में चोरी की घटना भी हो चुकी है। सराफा दंपति हत्याकांड के खुलासे के समय तत्कालीन अधिकारियों ने माल को ट्रेजरी के डबल लॉक में रखने का निर्णय इस वजह से लिया था, ताकि उसके साथ किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ न हो।

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