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3 अगस्त, 2020|12:08|IST

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गलका रोग का शिकार हो रही टमाटर व मिर्च

गलका रोग का शिकार हो रही टमाटर व मिर्च

लगातार हुई बारिश से सब्जी उत्पादक किसान अब नर्सरी को बचाने में काफी हलकान नजर आ रहे हैं। लगभग ढाई हजार से अधिक क्षेत्रफल में किसान टमाटर और मिर्च की खेती करते आ रहे हैं। 15 जुलाई के आसपास किसानों ने नर्सरी डाली थी, लेकिन लगातार बारिश से नर्सरी को बचाना किसानों के लिए भारी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि टमाटर, मिर्च की नर्सरी में गलका रोग सहित कीट-पतंगों से नर्सरी को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके चलते किसानों के माथे पर बल पड़ता जा रहा है। जिन किसानों ने नर्सरी को चारों तरफ से नहीं ढका है, उनकी नर्सरी बचा पाना काफी मुश्किल हो रहा है। समय-समय पर नर्सरी को बचाने के लिए आवश्यक कीटनाशकों का छिड़काव और नर्सरी को बढ़ाने के लिए कुछ खादों का प्रयोग किया जाता है। क्षेत्र के अनुभवी किसान देवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि लगातार बारिश से धूप नहीं होने से नर्सरी पर गलका रोग से 25 प्रतिशत टमाटर और मिर्च के पौधे खत्म हो गये हैं। ऐसे में शेष बची नर्सरी को बचाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यदि नर्सरी में उपर से गलन है, तो किसान रीडोमील दवा का प्रयोग करें। यदि नर्सरी में जड़ से गलने हो तो नेशियो नामक दवा का छिड़काव कराकर नर्सरी को बचाया जा सकता है। बताया कि नर्सरी को चारों तरफ तथा उपर भी जारी से जरूर ढंकें। बताया कि बेड के बाहर जाली के किनारे-किनारे फूरोडान दवा जरूर डाल दें, ताकि बाहरी कीट पतंगों का जाली में प्रवेश ना हो सके। ऐसे में लगातार हो रही बारिश सब्जी उत्पादक किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है।

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  • Web Title:Tomato and chillies falling prey to throat disease