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संत की संगति से होती है भक्ति की शुरुआत

सुहवल गांव के देवी मंदिर में चल रहे पांच दिवसीय संगीतमय रामकथा के दूसरे दिन कथा सुनाते हुए संत राहुल महाराज ने कहा कि संत भगवान से बड़ा होता है। भगवान का दर्शन सुलभ है, लेकिन संत का दर्शन दुर्लभ नहीं है। 

कहा कि भक्ति की शुरुआत संत की संगत से होती है। मोह माया छोड़ संत के पास जाना चाहिए। संत के सानिध्य होने से भगवान जीव को अपने शरण में ले लेते हैं। सत्य के सामान कोई धर्म नहीं सत्य के बल पर ही यह धरती टिकी है। महापुरुषों की संगत ही जीव को सद्गति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि साधु का दर्शन भगवान के दर्शन से भी बड़ा होता है। भगवान  जिसे अपना लेते हैं। साधु के शरण में दे देते हैं। संत की महिमा ब्रह्मा विष्णु महेश भी नहीं कर सकते है। कथा में पंडित  सदन बिहारी ने कहा कि राम के अपराध से तो आप बच सकते हैं, लेकिन राम के भक्तों पर अपराध करने पर आप बच नहीं सकते है। उन्होंने कहा कि समाजिक मानव समाज में पूज्य होते हैं। अपने बच्चे को संस्कारित करें। बच्चा संस्कारवान होगा, तो समाज व परिवार सुधर सकता है। कथा में राधेश्याम चौबे, भिखारी महाराज ने भी कथा का अमृत पान कराया। संचालन दया शंकर पांडेय ने किया। 

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  • Web Title:The association of a saint is beginning of devotion