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शाम-ए-हिन्दुस्तान: कविताओं की बारिश में श्रोता हुए सराबोर-VIDEO

मशहूर शायरा शबीना अदीब (फोटो: मोहम्मद मुकीद)

1 / 2मशहूर शायरा शबीना अदीब (फोटो: मोहम्मद मुकीद)

कवयित्री डॉ. भुवन मोहिनी (फोटो: मोहम्मद मुकीद)

2 / 2कवयित्री डॉ. भुवन मोहिनी (फोटो: मोहम्मद मुकीद)

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शाम-ए-हिन्दुस्तान में कविताओं की बरसात ने श्रोताओं को सराबोर किया। झमाझम बारिश के बीच श्रोताओं को साहित्य के विविध रूपों से रूबरू होने का मौका मिला। कभी हंसी के ठहाके गूंजे तो कभी वीर रस की कविताएं दिलों में जोश भर गईं। श्रृंगार की कविताओं ने मौसम से सुर मिलाए। लहुरी काशी के मंच पर कवियों के समागम ने शाम को यादगार बना दिया। रचनाओं पर तालियों की गड़गड़ाहट से परिसर गूंजता रहा।

रविवार को बारिश की बूंदों के बीच अवध पैराडाइज में मशहूर शायरा शबीना अदीब की कविताओं का आनंद लिया। उनकी नज्म 'मेरे मसीहा मैं जी उठूंगी, दुआएं दे दे दवा से पहले को सुनाया तो तालियां गूंज उठीं। खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें अभी तो चाहत नई-नई है ने महफिल की वाहवाही लूटी। 

कवियत्री डॉ. भुवन मोहिनी ने अपनी कविताओं को श्रृंगार रस में कुछ इस तरह डुबोया कि लोग भाव विभोर हो गए। हास्य रस के कवि गजेंद्र प्रियांशु ने राजनीतिक घटनाक्रमों को छंदों में ढालकर प्रस्तुत किया तो परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हेमंत पाण्डेय ने भी प्रस्तुति दी।

 

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  • Web Title:Sham e Hindustan in ghazipur