ऋषि पंचमी पर गंगा स्नान कर किया दान पुण्य
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जमानियां, हिन्दुस्तान संवाद। ऋषि पंचमी पर गुरुवार को पक्का बलुआ घाट पर महिलाओं ने गंगा स्नान कर दान पुण्य किया। साथ ही महिला श्रद्धालुओं ने संकल्प छुड़ाने के साथ ही पुजारियों से कथा भी सुनी। परिवार के सुख समृद्धि की मंगल कामना की। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस नजर रखी रही। पंडित उद्धव पांडेय ने बताया कि ऋषि पंचमी सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि जीवन में शुद्धता संयम और कृतज्ञता का संदेश देने वाला पर्व कहा गया है। इससे आत्मिक शांति मिलती है। बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला ऋषि पंचमी व्रत हिंदू धर्म में एक खास स्थान रखता है।
यह पर्व गणेश चतुर्थी के अगले दिन आता है। इसे पापों से मुक्ति तथा सातों ऋषियों की कृपा पाने का दिन माना गया है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में हुई जाने-अनजाने गलतियों का प्रायश्चित हो जाती है। खासकर महिलाओं के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह व्रत रजस्वला काल के दौरान हुए किसी भी धार्मिक दोष से मुक्ति दिलाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। साफ हल्के पीले रंग के कपड़े पहनना चाहिए। इसके साथ ही एक कलश में जल भरकर चौकी के पास रखना चाहिए। सप्त ऋषियों को धूप, दीप, फूल, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों की मदद करने का संकल्प लेना चाहिए। इसके साथ ही सप्त ऋषियों की आरती और व्रत कथा सुनना चाहिए। पुजारी शंभु पांडेय, गणेश पांडेय, ओमप्रकाश पांडेय आदि लोगों ने बताया कि ऋषि पंचमी पर्व पर गंगा स्नान पूजा और दान का विशेष महत्व रहता है। जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है।
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