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बीजों के उचित चयन से बढ़ेगी पैदावार

खरीफ की प्रमुख फसल धान के लिए रोहिणी नक्षत्र में नर्सरी तैयार करना उत्तम समय माना गया है। अच्छी पैदावार के लिए किसानों को पानी की उपलब्धता और पैदावार को ध्यान में रखते हुए नर्सरी तैयार करनी चाहिए। भूमि परीक्षण रासायनिक खादों का उचित मात्रा में प्रयोग और गहरी जुताई अच्छी पैदावार के लिए आवश्यक होती है।

जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी तैयार करने के लिए किसानों को चाहिए कि जिस खेत में धान के बीज की नर्सरी तैयार करनी है, उसकी जोताई 3 दिन करके छोड़ दें। तत्पश्चात चौथे दिन पानी भर दें और 2 दिन तक खेतों में पानी लगा रहने दें। इससे मिट्टी हल्की हो जाती है और जमीन के नीचे की गर्मी भी समाप्त हो जाती है। संध्या काल में बीज का छिड़काव किया जाना चाहिए। इससे किसान द्वारा छिड़काव किए गए बीजों के सौ प्रतिशत अंकुरण मिल सकता है। नर्सरी के खेत की तुरंत जोताई कर के बीज छिड़काव करने से हमेशा बीज के अंकुरण की मरने की संभावना बनी रहती है ।किसानों को अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग धान की नर्सरी में प्रयोग करना चाहिए। गोबर की खाद भी नर्सरी के लिए फायदेमंद साबित होगी। अच्छी पैदावार के लिए अच्छी किस्म के धान के बीज का चुनाव करना भी आवश्यक होता है। यदि किसान की जमीन  बांगर है तो कम पानी से तैयार होने वाले धान के फसल के बीज का चुनाव करना चाहिए और यदि भूमि क्यारी या ज्यादा समय तक पानी टिके रहने वाली मिट्टी का है तो उसमें पूरे समय के प्रजाति वाले धान के फसल का चुनाव करना चाहिए। किसानों को बीज का चुनाव करते समय धान की फसल की होने वाली ऊंचाई को भी ध्यान में रखना चाहिए। एक ओर जहां ज्यादा ऊंचाई रहने से फ़सलें जमीन पर गिर पड़ती हैं तो नहर वाले क्षेत्रों में कम ऊंचाई किराने के फसलें डूब भी सकती हैं। बीज के छिड़काव से पहले बीज को बोरे में भरकर 24 घंटे पानी में रखना चाहिए। फिर 24 घंटे उसे  पानी से बाहर निकाल कर रखना चाहिए और उसके बाद तुरंत बाद बीज का छिड़काव करा देना चाहिए।

धान की रोपाई से पूर्व तैयारी के विषय में किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए की जिन खेतों में धान के फसल की रोपाई करानी है उन खेतों की गहरी जुताई हो जानी चाहिए। गहरी जुताई करने से फसल में लगने वाले रोग की संभावना कम हो जाती है। साथ ही साथ किसानों को पहले ही अपने खेतों की मेड़ बंदी कर लेनी चाहिए। खेतों की मेड़ ऊंची रहनी चाहिए ताकि बरसात होने पर खेत में पानी रुक सके और 10 से 15 दिन तक नमी आराम से खेत में बनी रह सके। किसानों को अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से बचना चाहिए जिस खेत में धान की रोपाई करानी है उसका भूमि परीक्षण करा लेना चाहिए और जरूरत के अनुसार ही खादों का छिड़काव कराया जाना चाहिए। इतना ही नहीं किसानों को खरपतवार नाशक दवाओं का भी समुचित प्रयोग करना चाहिए। खरपतवार पैदावार को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं । साथ ही साथ किसानों को रोपाई करने से पूर्व खेत की समतलीकरण पर ध्यान रखना चाहिए ।खेत समतल होने से किसानों की लागत कम हो जाती है और खेत के हर भाग से अच्छी पैदावार आराम से मिल सकती है। नसीरुद्दीन पुर निवासी रमाकांत सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी में ज्यादा से ज्यादा जैविक खादों का प्रयोग करना चाहिए केमिकल फ़र्टिलाइज़र के प्रयोग करने से बीज के अंकुरण पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।  बहराइच निवासी रवद्रिं नाथ सिंह ने बताया कि जैविक खाद का मिक्चर बनाकर छिड़काव करने के उपरांत ही बीज का छिड़काव करें।

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  • Web Title:Increase yields by proper selection of seeds