सत्य न्याय धर्म और परोपकार के लिए किया जागरूक
Ghazipur News - गाजीपुर में श्री गंगा आश्रम ने वाराणसी के राम जानकी मंदिर में मानव धर्म व्याख्यानमाला का आयोजन किया। इसमें मानवता के सिद्धांतों पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने बताया कि धर्म का असली अर्थ संगठित होकर समाज को आलोकित करना है और परोपकार ही सच्चा धर्म है।

गाजीपुर, संवाददाता। श्री गंगा आश्रम देवकली की ओर से रविवार को वाराणसी के राम जानकी मंदिर लहुराबीर चौराहे पर एक मानव धर्म व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसमें वाराणसी के श्रद्धालुओं की ओर से एक प्रभात फेरी निकाली गई। जिसमें मानवता के मूलभूत सिद्धांतों सत्य न्याय धर्म और परोपकार के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि, मानव धर्म कोई नया विचार नहीं है और न ही कोई नया सूत्र देता है। यह उन्हीं विचारों को आधुनिक संदर्भों में सामने रखता है जो हजारों वर्षों से समाज को दिशा दे रहे हैं।संविधान में संशोधन हो सकते हैं, संविधान मनु स्मृति याज्ञवल्क्य स्मृति आधुनिक संविधान या इस्लामिक देशों में शरीयत के रूपों में हो सकते हैं, लेकिन धर्म कभी नहीं बदलता।
धर्म हमेशा से सत्य न्याय और परहित की ही बात करता है।लेकिन समय के प्रभाव से इन धर्मों पर धूल जमा हो जाती है। लोग गुरुओं, आश्रम, मंदिर, मस्जिद, पादरी, मूर्तियों, शास्त्रों की गुलामी को ही धर्म समझकर आपस में लड़ने लगते हैं। अनेक लोग पलायनवादिता, अकर्मण्यता, गरीबी और शोषण सहने को धर्म मानने लगते हैं। जबकि ये सब धर्म नहीं हैं।सभी के धर्म अलग अलग हो सकते है। किसी के लिए अहिंसा, किसी के लिए पत्नी धर्म, किसी के लिए पुत्री धर्म, किसी के लिए फौजी का हिंसक धर्म, किसी के लिए धनार्जन, किसी के लिए विद्यार्जन, किसी के लिए राजनीति इत्यादि। लेकिन ये सभी कर्म तभी धर्म बनते हैं जब इनमें परसेवा का भाव हो। इसलिए परमहंस बाबा गंगाराम दास कहते है कि परोपकारी धर्मात्मा बिना साधन भजन के भी परमात्मा को प्राप्त कर लेता है।उन्होंने कहा कि, धर्म का अर्थ संकुचित होना नहीं है, धर्म का अर्थ संगठित होकर समाज को आलोकित करना है। ज्ञान बल धन इत्यादि को मुक्त हस्त से बांटना ही धर्म है। तीर्थाटन में पैसे खर्च करने वाले को गंगा बाबा किसी गरीब की लड़की की शादी में पैसे खर्च करने के लिए कहते थे जो वास्तविक धर्म है। मूर्तियों मंदिरों और मस्जिदों कुरआन और पुराणों के धर्म में हम इंसानों का धर्म भूल गए। इस दौरान भोला बाबा, राजेंद्र, इंद्रदेव सिंह ने भी संबोधित किया। संचालन साहिब ने किया।
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