
गांवों में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चे होंगे चिंहित
Ghazipur News - - बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से चलेगा अभियान - बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से चलेगा अभियान - बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से चलेगा अभियान
गाजीपुर, संवाददाता। कुपोषण मुक्त जनपद बनाने के लिए डीपीओ ने तैयारी शुरु कर दी है। अब 17 परियोजनाओं में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चें चिंहित किये जाएंगे। चिंहित बच्चों को नियमित पोषाहार सहित चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा। जिससे कुपोषण को मुक्त किया जा सके। गाजीपुर को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए आइसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा लगातार पोषण के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन अब पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए नई पहल की शुरूआत की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने इसके संबंद्ध में संबंधित सीडीपीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है।
जारी पत्र में कहा गया है कि जन-जागरूकता एवं आदतों में परिवर्तन लाने के लिए पोषण संबंधित संदेशों को प्रदर्शित किया जाए। ताकि आमजनों को पोषण के बारे में सही-सही जानकारी मिल सके। इस अभियान के दौरान आंगनवाड़ी सेविका सहायिका, आशा, एएनएम कार्य करेंगी। इस अभियान के तहत बच्चों के पोषण स्तर तथा सामान्य कुपोषित व अति कुपोषित किस श्रेणी का आंकलन किया जाएगा। इन सभी बच्चों की जानकारी एंट्री पोषण ट्रैकर व पोषण अभियान बोर्ड पर निश्चित रूप से संभावित किया जाएगा। केंद्रों पर मां बच्चे व संपूर्ण परिवार के पोषण संबंधित समस्याओं के निराकरण, बाल परामर्श, छह वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा संबंधी गतिविधियों की जानकारी व प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की जानकारी सहित अन्य विषयों पर जानकारी दी जाएगी। पांच वर्षो तक बच्चों का होगा वजन गांवों में भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां शून्य से पांच वर्षों तक बच्चों का वजन करेंगी। जिसके बाद वजन कम होने या कुपोषित और अतिकुपोषित में आने पर निर्धारित अवधि तक पोषाहार सहित चिकित्सकीय परामर्श दिलाकर सुपोषित करने का भी करेंगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारी पूरी ली गयी है। बीस हजार है कुपोषित बच्चें जनपद में अतिकुपोषित और कुपोषित करीब 20 हजार बच्चें है। इन बच्चों को सुपोषित करने के लिए विभाग की ओर से जागरूकता अभियान के साथ ही नए कुपोषित बच्चों को भी चिंहित करने का काम किया जाएगा। एनआरसी में कराएंगे भर्ती गांवों में चिंहित अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती करने की भी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की होती है। अब सभी सैम मैम और अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल के एनआरसी में भर्ती कराते हुए इलाज करायेंगी। जिससे बच्चों के सेहत में सुधार होकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सके।

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