जंग की तपिश: महंगे कॉमर्शियल सिलेंडर से बढ़ी थाली की कीमत
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की बढ़ोतरी ने खानपान कारोबार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए संचालन लागत अचानक बढ़ गई है। इससे खाने-पीने की चीजों के दाम जल्द ही बढ़ सकते हैं।

गाजीपुर, संवाददाता। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की बढ़ोतरी ने खानपान कारोबार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए संचालन लागत अचानक बढ़ गई है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम जल्द ही बढ़ सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि कुल लागत का करीब 12 फीसदी हिस्सा एलपीजी पर खर्च होता है, ऐसे में कीमत बढ़ना सीधे मुनाफे पर असर डाल रहा है। प्रशासन की ओर से गैस की सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण एजेंसियों पर दबाव साफ दिख रहा है। सुबह से ही एजेंसियों पर सिलेंडर लेने के लिए उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ रहा है।
कारोबारियों की चिंता
शहर के महुआबाग, मिश्रबाजार, लंका कचहरी स्थित छोटे होटल संचालकों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो उन्हें कारोबार सीमित करना पड़ेगा या खानपान संबंधित खाद्य सामग्री के दाम में वृद्धि ही एक मात्र विकल्प है। कचहरी स्थित ढाबा संचालक अशोक, जयप्रकाश ने बताया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर दाम बढ़ने से खाने की थाली की कीमत में दस से 15 रूपया वृद्धि होने की संभावना है। मिश्रबाजार के छोटे होटल संचालक पप्पू गुप्ता ने बताया कि पहले 20 रूपया में पांच पुड़ी सब्जी बिकती थी, अब 30 रूपया कर दिया गया है। इसका असर आम जनता पर भी साफ दिखने लगा है। अब होटल-रेस्टोरेंट में खाना, स्ट्रीट फूड, यहां तक कि चाय-नाश्ता भी महंगा हो रहा है। शादी-विवाह और अन्य आयोजनों की कैटरिंग लागत बढ़ गई है। मिठाई, स्नैक्स, पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट फूड्स के दामों में भी बढ़ोतरी की संभावना है। विश्वेश्वरगंज स्थित होटल संचालक मेन्यू में बदलाव, कुछ आइटम हटाने या सीमित विकल्प रखने पर विचार कर रहे हैं।
उत्पादन लागत में वृद्धि
एलपीजी पर निर्भर बेकरी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और छोटी मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों की उत्पादन लागत भी बढ़ गई है। दिलदारनगर के बेकरी संचालक विवेक जयसवाल ने बताया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी के चलते उत्पाद महंगे होने या मात्रा और गुणवत्ता में कमी की आशंका है। साथ ही परिवहन और प्रोसेसिंग लागत भी प्रभावित हो रही है। वैकल्पिक ईंधन की ओर रुझान बढ़ रहा है।
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