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22 सितम्बर, 2020|6:26|IST

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मौसम बदलने से मछलियों को विशेष देख-रेख की जरूरत

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किसान वर्तमान समय में मौसम के तापमान में अचानक बदलाव होने की वजह से मत्स्य पालकों को अनेक समस्या आना शुरू हो जाती है। सर्वप्रथम मत्स्य पालक एक-दूसरे से सामाजिक दूरी दो गज की बनाये रखें। घर में रहें, सुरक्षित रहें तथा कुछ भी मत्स्य पालन से जुड़े कार्य करने के पहले व बाद में अपने हाथ को अच्छी तरह साबुन से धोयें। यदि बहुत आवश्यकता हो, तभी बाहर निकलें। निकलते समय मुंह को गमछे या रूमाल से ढंक कर ही निकलें। वर्तमान समय में बाजार दर उचित नहीं मिलने से मछलियों के निष्कासन व विपणन से बचें। एक स्थान पर ज्यादा लोग एकत्रित ना हों। तालाब में समूह में ना एकत्रित होकर फेंका जाल का प्रयोग करें।

मछलियों के प्रजनन काल की तैयारी करें। नर व मादा मछलियों को अलग करके खाद की मात्रा में दें। मौसम बदलने से मछलियों को विशेष देख-रेख की जरूरत है। तापमान से तालाब के जल की गुणवत्ता खराब हो जाती है तथा भोजन की मांग लगती है। ऐसे में परजीवी के प्रकोप होने के अधिक चांस रहते हैं इससे बचने के लिए शाम सुबह तालाब में एक से आधे घंटे ताजा पानी अवश्य चलायें। वैसे वर्तमान परिदृश्य में आर्कुलस नामक परजीवी का प्रभाव देखा जा रहा है इससे बचाव के लिए तालाब में 100 ग्राम चूना, 200 ग्राम लाल दवा प्रति एकड़ की दर से डालें तथा परजीवी के नष्ट होने हेतु तालाब में 15 मिली. प्रति एकड़ की दर से क्लिनर का छिड़काव तीन बार एक-एक सप्ताह के अंतराल पर करें। यदि रोग ना हो तथा रोग की सम्भावना लग रही हो तो एक किलोग्राम हल्दी तथा 10 किलोग्राम चूने का घोल बनाकर छिडकाव करें जिससे रोग की रोकथाम की जा सके। साथ ही साथ मछलियों की लैंडिग केन्द्र को स्वच्छ एवं कीटाणुरहित करने के लिए नियमित अंतराल पर ब्लीचिंग पाउडर, सोडियम हाइपोक्लोराइड तथा प्राच्छालक के साथ साफ किया जा सकता है। साथ ही मत्स्य पालन में प्रयोग हो रहे उपकरणों को समय-समय पर कीटाणुरहित करते रहना चाहिए। यदि मत्स्य पालक किसी तरह की समस्या महसूस करते हों तो कृषि विज्ञान केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डा. डीपी श्रीवास्तव से उचित परामर्श ले सकते हैं।

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  • Web Title:Fish needs special care due to changing weather