अमृत सरोवर के हाल बदहाल, पिकनिक स्पॉट पर उगा घासफूस

हिन्दुस्तान, गाजीपुर
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अमृत सरोवर के हाल बदहाल, पिकनिक स्पॉट पर उगा घासफूस

गाजीपुर, संवाददाता। बेतहाशा गर्मी अपना असर दिखाना शुरू कर चुकी है, लेकिन क्षेत्र के अमृत सरोवरों की सुध जिम्मेदारों को नहीं है। ज्यादातर सरोवर बदहाल हैं। तमाम सरोवर सूखे पड़े हैं। कहीं बेंच क्षतिग्रस्त है तो कहीं पिकनिक स्पॉट वाले स्वरूप की जगह घासफूस दिख रही है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए बेहतर माहौल स्थापित करने की मुहिम दम तोड़ती दिख रही है। जल संरक्षण करने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों को अमृत सरोवर का रूप देकर कायाकल्प कराने के लिए निर्देश जारी किया था। गाजीपुर में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक 71 करोड़ रुपये से 312 अमृत सरोवरों का निर्माण हुआ है। इनमें साफ-सफाई और देखरेख नहीं होने से 50 प्रतिशत सरोवर बदहाल हैं। सरोवरों के पास झाड़ियां हैं। साइनेज बोर्ड तक भी नहीं लगा है। पौधरोपण व बेंच की सुविधा भी नदारद है। वहीं अधिकांश सरोवरों के निर्माण में मनरेगा विभाग ने सिर्फ खानापूर्ती की है। सरोवर के नाम पर गड्ढे की खोदाई कर पानी भर दिया गया है। एक अमृत सरोवर के निर्माण पर 23 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। गड्ढों में पानी भरने को लेकर किसी भी अमृत सरोवर पर सबमर्सिबल की व्यवस्था नहीं की गई है। इन दिनों बारिश होने से भले ही अमृत सरोवरों में पानी नजर आ रहा है, जिससे बढ़ती गर्मी में यहां धूल ही उड़ती है। साफ-सफाई नहीं होने से झाड़िया उग आईं हैं। झाड़ियों की कटाई-छंटाई नहीं होती है। सीढि़यों पर खर-पतवार इकट्ठा हैं। पौधरोपण का प्रावधान है, लेकिन कई जगहों से पौधरोपण की व्यवस्था नदारद है। बेंच, स्ट्रीट लाइट नहीं है। पाथ-वे का निर्माण नहीं किया गया है。

जांच में फंसा अमृत सरोवर

दुल्लहपुर। क्षेत्र में बने अधिकांश अमृत सरोवर कागजों में ही सिमट कर रह गये है। मुस्तफाबाद उर्फ बड़ागांव के पबया अमृत सरोवर के बीच भाग की खुदाई कराई गई है। लेकिन अन्य कोई इंतजाम नहीं है। यहां पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग तक नहीं बने है। लोग बिजली के खंभे के सहारे नहर पार कर सरोवर तक पहुंचते है। ग्राम प्रधान जफरपुर श्रीकेश गोड़ ने कहा कि सरोवर से संबंधित फाइल जांच मे होने के कारण पूर्ण नहीं हो सका है।

बजट के अभाव में पड़ अधूरा

दिलदारनगर। थाना क्षेत्र के उसियां में स्थित अमृत सरोवर योजना के तहत एक तालाब का निर्माण अधूरा पड़ा है। उसियां गांव के पूर्वी हिस्से में गाटा संख्या 4294 पर यह तालाब बनाया जा रहा था। इस स्थान पर अवैध कब्जा हटाकर खुदाई करायी गयी। ग्राम प्रधान शम्स तबरेज खान ने बताया कि बजट के अभाव में कार्य पूरा नहीं हो सका। बताया कि जैसे ही धन उपलब्ध होगा, तालाब का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।

अमृत सरोवर बना मछली पालन का साधन

खानपुर। क्षेत्र के ग्राम सभा सौना में करीब 37 लाख रुपये की लागत से बना अमृत सरोवर में मछली पालन कराया जा रहा है। जिससे इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरोवर में मछली पालन होने के कारण पशु न तो वहां पानी पीने जा पाते हैं और न ही नहा पाते हैं। गर्मी के मौसम में जहां अमृत सरोवर लोगों और जानवरों के लिए राहत का साधन बनना चाहिए था, वहीं अब यह केवल निजी उपयोग तक सीमित होकर रह गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सरोवर की हालत खराब है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। खंड विकास अधिकारी धर्मेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अमृत सरोवर गांव की संपत्ति होती है। सामूहिक किसी एक व्यक्ति द्वारा अमृत सरोवर में मछली पालन नहीं किया जा सकता। इसकी जांच करायी जाएगी। जांच में दोषि पाये जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमृत सरोवरों की स्थिति कैसी है?
अमृत सरोवरों की स्थिति बेहद खराब है, ज्यादातर सरोवर सूखे पड़े हैं और बदहाल हैं।
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