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राशन उठान का भाड़ा न मिलने से समूह की महिलाएं हुईं कर्जदार

शुकुलबाजार। संवाददाता राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत बाल विकास विभाग से ड्राई राशन का...

राशन उठान का भाड़ा न मिलने से  समूह की महिलाएं हुईं कर्जदार
हिन्दुस्तान टीम,गौरीगंजMon, 26 Feb 2024 05:00 PM
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शुकुलबाजार। संवाददाता

राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत बाल विकास विभाग से ड्राई राशन का उठान करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पिछले ढाई वर्ष से भाड़ा नहीं मिला है। उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं कर्जदार हो गई हैं।

बाल विकास विभाग की ओर से गांवों में गर्भवती-धात्री महिलाओं,कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चों एवं किशोरियों में वितरित कराए जाने वाले ड्राई राशन के उठान का दायित्व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपा गया था। इसके बदले महिलाओ को छह रुपए प्रति लाभार्थी की दर से भाड़ा दिए जाने का आदेश है। तभी से नामित समूह बाल विकास परियोजना विभाग के गोदाम से ड्राई राशन का उठान कर गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्राप्त कराती है।

मवैया रहमत गढ़ की ग्राम पंचायत के जय दुर्गा सहायता समूह की महिला गीता बताती हैं कि उनका समूह ड्राई राशन उठान के लिए नामित है। वह ढाई वर्ष से राशन का उठान भी कर रही हैं। परंतु भाड़े के नाम पर अभी तक उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला। किसान स्वयं सहायता समूह सेवरा गांव की सुनीता देवी बताती हैं कि वह पिछले छह माह से कर्ज लेकर राशन का उठान कर रही हैं। भाड़ा न मिलने की वजह से लोगों ने उन्हें कर्ज देना भी बंद कर दिया है। बुध स्वयं स्वयं सहायता समूह की माया देवी बताती हैं कि बीते माह में हम लोगों ने आर्थिक तंगी के कारण ड्राई राशन उठान करने में असमर्थता व्यक्त करते हुए बाजार शुकुल विकास खंड के राष्ट्रीय आजीविका मिशन कार्यालय में शिकायत की। माँझगांव के प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की महिला बताती हैं कि राशन की उठान करते-करते हम सब महिलाएं कर्ज में डूब चुकी हैं।

इनकी भी सुनिए

डीपीओ संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि बाजारशुकुल बाल विकास परियोजना गोदाम से 54 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ड्राई राशन का उठान करती हैं। इनका भाड़ा बाल विकास विभाग से ग्राम्य विकास विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाता है। समूह के खातों में पैसा भेजना ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी है।

प्रभारी एडीओ एनआरएलएम मनोज मिश्र ने बताया कि उनके स्तर से लाभार्थियों का आंकलन करके भाड़ा भुगतान के लिए डाटा प्रत्येक माह जिला मुख्यालय भेज दिया जाता है। शीघ्र ही समूहों के खाते में भाड़े की धनराशि पहुंच जाएगी।

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