सत्य और समर्पण ही सनातन धर्म का मूल आधार

Feb 13, 2026 04:39 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गौरीगंज
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Gauriganj News - गौरीगंज के रंजीतपुर वार्ड में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री ने सत्यं परम धीमहि को जीवन का मूल संदेश बताया। उन्होंने कहा कि सच्चा समर्पण प्रभु की इच्छा को स्वीकार करना है। भीष्म पितामह के उदाहरण से सत्य और धर्म के महत्व को समझाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सत्य और समर्पण ही सनातन धर्म का मूल आधार

गौरीगंज, संवाददाता। गौरीगंज के रंजीतपुर वार्ड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री ने पुष्प समर्पित कर कथा का शुभारंभ किया। अपने प्रवचन में उन्होंने भागवत महापुराण के प्रथम श्लोक की अंतिम पंक्ति सत्यं परम धीमहि को जीवन का मूल संदेश बताते हुए कहा कि सनातन धर्म अच्छी बात कहने के लिए नहीं, बल्कि सच्ची बात कहने के लिए बना है। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा का सार सत्यमेव जयते नानृतम् में निहित है। जिसका अर्थ है कि सत्य की ही विजय होती है, असत्य कभी विजयी नहीं हो सकता। महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथा वाचक ने भीष्म पितामह के समर्पण भाव को धर्म का सर्वोच्च उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भीष्म को सत्य और विजय का ज्ञान होते हुए भी वे अपने कर्तव्य और परमात्मा की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पित रहे। उन्होंने बताया कि सच्चा समर्पण वही है, जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छा नहीं, बल्कि प्रभु की इच्छा को स्वीकार करता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति से ही आत्मबल का अवतरण होता है और समर्पण की भावना व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है। कथा आयोजक पूर्व सभासद सुनील द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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