रेफर सेंटर बन गई है जिला अस्पताल की इमरजेंसी

Newswrap हिन्दुस्तान, गौरीगंज
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Gauriganj News - अमेठी जिले के अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का आभाव है। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की तैनाती नहीं है और मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। पैथोलॉजी में भी स्थिति खराब है, जिससे मरीजों को प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।

रेफर सेंटर बन गई है जिला अस्पताल की इमरजेंसी

अमेठी। मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। आकस्मिक बीमारी की स्थिति में जिला अस्पताल की इमरजेंसी महज खाना पूर्ति तक सीमित है। गंभीर मरीजों की बात तो छोड़िए सामान्य रूप से बीमार मरीजों को भी तुरंत रेफर कर दिया जाता है। बुधवार को हिन्दुस्तान टीम ने जिला अस्पताल का जायजा लिया तो हालात चिंताजनक नजर आये। इमरजेंसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का आभाव

जिला अस्पताल की इमरजेंसी की स्थिति

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। कुल छह बेड का इमरजेंसी वार्ड बनाया गया है।ज्यादा भीड़ होने पर सामान्य वार्ड में मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। इमरजेंसी स्टॉक में केवल इंजेक्शन उपलब्ध है दवाओं की कोई व्यवस्था नहीं है। रात में जन सुविधा केंद्र भी बंद रहता है। दिन में इस केंद्र पर 250 से 300 मरीज दवाओं के लिए पहुंचते हैं।

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अस्पताल की पैथोलॉजी का हाल बेहाल

जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में गंभीर तो छोड़िए सामान्य बीमारियों की जांच के लिए भी बेहतर इंतजाम नहीं है। पैथोलॉजी में डॉक्टर तकनीकी स्टाफ का आभाव है। नर्सिंग ऑफ़ फार्मेसी कर रहे प्रशिक्षुओं से काम चलाया जा रहा है। दिन में 12 बजे के बाद आने वाले मरीजों को भी जांच की सुविधा नहीं मिल पाती है। इमरजेंसी में रात के समय जांच का कोई इंतजाम अस्पताल में नहीं है। मरीजों को रात के समय प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड जांच सप्ताह में सोमवार, गुरुवार व शनिवार केवल तीन दिन ही हो रही है। बाकी तीन दिन ताला लगा रहता है।

सामान्य रूप से बीमार मरीजों को भी कर दिया जाता है रेफर

जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। जिसके चलते मानसिक रोगी, पेट संबंधी समस्या, यूरिन, गंभीर रूप से घायल या अन्य कोई समस्या से ग्रस्त मरीज इमरजेंसी में इलाज के लिए जब पहुंचता है तो उसे तुरंत रेफर कर दिया जाता है। केवल पेट दर्द बुखार व उल्टी दस्त से संबंधित मरीजों को ही किसी तरह भर्ती कर उपचार किया जाता है। बीते एक माह की बात करें तो इमरजेंसी में उपचार के लिए कुल 536 मरीज अस्पताल पहुंचे थे। जिसमें से 275 मरीजों को लखनऊ व रायबरेली के लिए रेफर कर दिया गया।

कोट

जिला अस्पताल में आधुनिक पैथोलॉजी केंद्र का निर्माण हो रहा है। लगभग दो माह में यह संचालित हो जाएगा। जिसके बाद 24 घंटे जांच की सुविधा मिलने लगेगी। इमरजेंसी में आने वाले मरीज का उपचार किया जाता है। गंभीर रूप से बीमार हुआ दुर्घटनाग्रस्त मरीज को ही अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है।

डा. बीपी अग्रवाल

सीएमएस, जिला अस्पताल।

सामान्य प्रश्न

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों की तैनाती क्यों नहीं है?
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है।

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