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जर्जर भवनों में संचालित हो रहीं सहकारी समितियां

जर्जर भवनों में संचालित हो रहीं सहकारी समितियां

संक्षेप:

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Nov 28, 2025 05:12 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गौरीगंज
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शुकुल बाजार,संवाददाता। किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए स्थापित साधन सहकारी समितियों के भवन जर्जर हाल में पहुंच गए हैं। क्षेत्र की कई समितियों में टूट-फूट और रिसाव के कारण खाद व बीज को सुरक्षित रखना कठिन हो गया है। इससे कर्मचारियों के साथ किसान भी परेशान हैं। भवनों की जर्जर हालत का सीधा असर धान क्रय केंद्रों के संचालन पर भी पड़ रहा है। बदहाल भवनों से धान खरीद और भंडारण व्यवस्था प्रभावित है। ब्लाक क्षेत्र में नौ साधन सहकारी समितियां और दो संघ संचालित हैं। अब्दुल्ला बाहरपुर, किसनी, बाजार शुकुल, दक्खिनगांव, क्यारपाली और नीमपुर की समितियां किसी तरह चल रही हैं, जबकि आशीषपुर और बरसंडा की समितियां वर्षों से बंद हैं।

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महोना व बाजार शुकुल संघ सहित सभी समितियों के भवन करीब चार दशक पहले बनाए गए थे। रख-रखाव के अभाव में अब इनकी हालत बिगड़ चुकी है। बरसात में कई समितियों की छत से पानी टपकने लगता है। दीवारों में पड़ी दरारें हादसे की आशंका बढ़ा रही हैं। बाजार शुकुल समिति का भवन सबसे अधिक जर्जर है, जहां वर्षों से ताला बंद है। भवनों की बदहाली के कारण सचिव समय से पहले खाद की उठान करने से भी कतराते हैं, जिससे किसानों को दिक्कत होती है। समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रशांत कुमार शुक्ला ने कहा कि शासन स्तर पर ध्यान न दिए जाने से समितियों की हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। ऐसे भवनों में धान और गेहूं की खरीद कर पाना मुश्किल है। कई बार अधिकारियों को समस्या बताई गई, लेकिन सुधार नहीं हुआ। किसनी गांव निवासी ग्राम प्रधान अबरार अहमद ने बताया हम लोग समय पर खाद लेने आते हैं, लेकिन भवन की हालत देखकर खुद डर लगने लगता है। वहीं किसनी समिति के उपभोक्ता राजेश तिवारी ने कहा कि रिसाव और टूट-फूट के बीच सामान रखना भी जोखिम भरा है। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं। बुजुर्ग किसान रामसागर ने बताया कि भवन जर्जर होने से धान क्रय केंद्र की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। छोटे किसानों को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ती है। बाजार शुकुल समिति के सदस्य सूर्यनगर निवासी पंकज त्रिपाठी ने कहा कि पहले समितियों के भवन सुरक्षित थे, अब तो अंदर जाना भी खतरे से खाली नहीं। एडीओ कोआपरेटिव आलोक दुबे ने बताया कि नीमपुर, सत्थिन, आशीषपुर, बरसंडा और दक्खिनगांव को छोड़कर सभी समितियों व संघों के भवन जर्जर हो गए हैं। उच्चाधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। धन मिलते ही जर्जर भवनों की मरम्मत कराई जाएगी।