सोनबरसा गांव के इकलौते हैंडपंप पर लगती है लंबी कतार

Apr 17, 2026 03:47 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गंगापार
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Gangapar News - पेयजल संकट मांडा। मांडा पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर

सोनबरसा गांव के इकलौते हैंडपंप पर लगती है लंबी कतार

मांडा पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर नीचे जाने के कारण कुओं और हैंडपंपों के सूखने का सिलसिला शुरू हो गया है। हर साल गर्मी के मौसम में पहाड़ी क्षेत्र के तमाम गांवों में स्थानीय प्रशासन को टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराना पड़ता है। कुओं और हैंडपंपों के सूखने के साथ ही पेयजल संकट गहराना शुरु हो गया है। पहाड़ पर बसे सोनबरसा गांव के ठीक इकलौते हैंडपंप पर ग्रामीणों की काफी भीड़ लगती है। जनपद के दक्षिणी पहाड़ी भूभाग में स्थित मांडा विकास खंड क्षेत्र के सोनबरसा गांव के ऊसर बस्ती के उर्मिला, चंद्रकली, सीमा देवी, पार्वती, श्यामलाल, शीतला, राम गोपाल, किनकू, संतोष आदि लोगों ने बताया कि मोहल्ले के ज्यादातर हैंडपंप सूख गये हैं।

केवल एक हैंडपंप ठीक है। इस इकलौते हैंडपंप पर सुबह से शाम तक पेयजल के लिए लाइन लगी रहती है। दोपहर के भीषण धूप में भी शुक्रवार दोपहर पेयजल के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी रही। इस क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन पहाड़ी गांवों में हर साल अप्रैल खत्म होते होते पेयजल संकट गहराने लगता है। नदी, तालाबों और नहरों में पानी न होने से मांडा क्षेत्र का जलस्तर अप्रैल बीतते बीतते काफी नीचे चला जाता है। जलस्तर नीचे जाने के साथ ही गांवों के कुओं और हैंडपंपों का पानी मटमैला होना शुरू हो जाता है, जो अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक कीचड़ में बदल जाता है। मांडा दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र के उपरौध इलाके के हाटा और मझिगवां न्याय पंचायत के दो दर्जन ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांवों में पेयजल संकट गहराने के साथ ही लोगों की सबसे बड़ी समस्या अपने परिजनों के लिए पेयजल की व्यवस्था करनी हो जाती है। मांडा उपरौध क्षेत्र के मेंहा, दोहथा, कूदर, नेवारी, परोहनी, परसीधी आदि तमाम गांवों के लोग पेयजल संकट से अधिक परेशान रहते हैं। मांडा उपरौध क्षेत्र के गांवों के अलावा मांडा खास मांडवी देवी पहाड़, बूढ़े नाथ पहाड़ी, कोसड़ा कला पहाड़ी, मसौली, जफरा, सांड़ी, सुरवांदलापुर, देवरी आदि तमाम पहाड़ी गांवों में भी अप्रैल के अंत तक पेयजल हेतु चार बजे भोर से ही लोग ठीक ठाक बचे सीमित हैंडपंपों और कुओं पर पेयजल के लिए बाल्टी व डिब्बे लिए लाइन में लगे दिखाई देते हैं। हैंडपंप पर पहले पानी भरने के विवाद में क्षेत्र के तमाम गांवों में गर्मी के मौसम में मारपीट और विवाद भी होते रहते हैं। जिस इलाके में आम इंसान ही पेयजल के लिए परेशान हो, उस क्षेत्र के पालतू पशुओं और मवेशियों की पेयजल के अभाव में क्या दुर्दशा होती होगी ,इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। तालाबों, नहरों, नदियों और कुओं में पानी न होने से हर साल गर्मियों के मौसम में चारे पानी के अभाव में तमाम पशुओं और मवेशियों की असमय मौत भी हो जाती है। मांडा पहाड़ी क्षेत्रों के तमाम संपन्न लोग अप्रैल के अंत तक गर्मी और पेयजल संकट बढ़ने के साथ ही अपने पालतू पशुओं और मवेशियों को नात रिश्तेदारी में भेजकर सपरिवार दो महीने के लिए शहरों में चले जाते हैं। फिलहाल गर्मी बढ़ने के साथ ही धीरे धीरे पेयजल संकट का गहराना शुरु हो गया है।

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