रास्ते की मांग को लेकर बढ़ता जा रहा ग्रामीणों का आक्रोश
Gangapar News - मांडा। उमापुर कला गांव के ग्रामीणों द्वारा रास्ते को लेकर पिछले पांच साल से मांग की जा रही है। ग्रामीणों ने स्थानीय से लेकर दिल्ली तक अपनी फरियाद
उमापुर कला गांव के ग्रामीणों द्वारा रास्ते को लेकर पिछले पांच साल से मांग की जा रही है। ग्रामीणों ने स्थानीय से लेकर दिल्ली तक अपनी फरियाद की। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में मतदान का पूर्ण रूप से बहिष्कार भी किया, लेकिन फिलहाल अभी तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा। मांडा विकास खंड क्षेत्र के गंगा तट पर बसे उमापुर कला ग्राम पंचायत के लगभग डेढ़ हजार ग्रामीणों को रास्ते के अभाव में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उमापुर कला गांव से वैसे तो प्रयागराज मिर्जापुर राजमार्ग मात्र दो सौ मीटर है, लेकिन बीच में दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग होने के कारण आवागमन में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
पहले जब यह रेलमार्ग मात्र अप और डाउन था, तब तक ग्रामीण किसी तरह जोखिम उठाकर रेललाइन पार करके राजमार्ग पर आ जाते थे, लेकिन अब डीफसी और दोनों ओर से रेलमार्ग बंद कर दिये जाने से अब रेलमार्ग से जाना पूरी तरह बंद हो जाने के कारण ग्रामीणों को अब छह से सात किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करके तब प्रयागराज मिर्जापुर राजमार्ग पर पहुंचना पड़ता है। स्कूली बच्चों, किसानों, वृद्धों, महिलाओं आदि को इस लंबी कवायद से काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। रेलमार्ग पार करते वक्त दुर्घटना भी होती रहती है। 28 जुलाई 2024 को गांव के अस्सी वर्षीय बुजुर्ग रमाशंकर दुबे की रेलमार्ग पार करते वक्त ट्रेन के चपेट में आने से दुखद मौत भी हो चुकी। दो दिन पहले गांव में बारात विदा कराने डीजे लेकर जा रहा डीजे चालक ओम प्रकाश बिंद बीस वर्ष डीजे सहित लटकते हाईवोल्टेज तार के चपेट में आने से घायल हो गया था। घायल को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ी। गांव के प्रधान राम किशुन, दिनेश कुमार द्विवेदी, कृष्ण कुमार दुबे, सुरेंद्र कुमार दुबे, जयंत्रीलाल, सभाजीत दुबे, हिमांशू दुबे ,राजेश दुबे, राम किशुन निषाद, गुड्डू दुबे , विजय शंकर, सभा शंकर, राम करन दुबे , ओमप्रकाश दुबे आदि तमाम लोगों ने बताया कि पिछले पांच साल में ग्रामीणों ने थाना व तहसील दिवस से लेकर जनपद , प्रदेश व देश के लगभग सभी जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं को ज्ञापन दिया। मौके पर धरना , प्रदर्शन भी हुए । यहां तक कि रेलवे अंडरब्रिज की मांग को लेकर ग्रामीणों ने इस बार लोकसभा चुनाव का शत प्रतिशत बहिष्कार भी किया, लेकिन हर बार मौके पर आये अधिकारी व जन प्रतिनिधि केवल आश्वासन ही देते रहे हैं। अब मजबूरन ग्रामीणों को रेलवे का काम रोकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सड़क के लिए वे अपनी भूमिधारी जमीन भी देने को तैयार हैं , लेकिन फिर भी शासन प्रशासन उनको रास्ता नहीं दे रहा है ,जिससे ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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