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पीने के पानी के संकट से जूझ रहा है बारा,

पीने के पानी के संकट से जूझ रहा है बारा,

बारा क्षेत्र के पहाड़ी गांव के ही साथ साथ तरहारी क्षेत्र के गांवों में पानी की समस्या बरकरार है। शासन द्वारा संचालित ग्राम समूह पेय जल योजनाओं में से अधिकांश प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं। जिलाधिकारी प्रयागराज द्वारा गोद लिए गांव के निवासी गंदा व बदबूदार पानी पीने को विवश है। गांव वाले मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करने में मशगूल हैं। पानी की समस्या को प्रशासन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

गंदा पानी पीने को मजबूर हैं डीएम के गांव के लोग

जिलाधिकारी प्रयागराज ने बारा तहसील के बांसी गांव के मजरा पटपर को दो वर्ष पहले गोद लिया था। डीएम द्वारा गांव के विकास व ग्रामीणों की जीवन स्तर का उठाने का प्रयास किया गया। डीएम प्रयागराज ने इस गांव को इस लिए गोद लिया था कि यहां कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक थी। डीएम के प्रयास से कुपोषण से गांव मुक्त हो गया है। गांव की गलियों में इंटरलाकिं हो गई है। गांव को क्लस्टर एवं लोहिया आवास योजना व प्रधानमंत्री आवास यांजना से आच्छादित किया गया है। इसके बावजूद गांव के लोग गंदा व बदबूदार पानी पीने को विवश है। गांव में इंडियामार्का पांच सरकारी हैँडपंप हैं किंतु सभी का पानी गंदा व बदबूदार है। इसके बावजूद ग्रामीण इसी पानी को पीने के लिए विवश हैं। केशकली, राजकुमारी आदि का कहना है कि पानी को भर कर रख दिया जाता है तो वह हल्दी के रंग की तरह पीला हो जाता है और उसमें से बदबू आने लगती है। इसकी शिकायत किसी से नहीं की गई है।

ग्राम समूह पेयजल योजना तातारगंज

ग्राम समूह पेय जल योजना तातरगंज का पंप संख्या एक पानी छोड़ देता है। एक पंप के सहारे पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके कारण तातारगंज, सरसेड़ी, परसरा, पचखरा, कोलन का पुरवा,छीड़ी सहित दर्जनों गांव पानी के संकट से जूझ रहे हैं। इस समय तातारगंज पंप हाउस तक बिजली की आपूर्ति ठीक से नहीं हो पा रही है। ट्रांसफार्मर के पास केबिल का तार छूट जाता है। इसके कारण भी पानी की आपूर्ति बाधित हो रही है।

ग्राम समूह पेयजल योजना चिल्ला गौहानी

एकल ग्राम समूह पेयजल योजना चिल्ला गौहानी में शासन ने लाखों रुपया खर्च करके दो ट्यूववेल व पानी की टंकी बनवाया। ग्राम समूह पेयजल योजना के निर्माण शाखा के अधिकारियों ने बिना काम पूरा कराए ग्राम पंचायत को सौंप दिया। पंप लगने के बाद से ही एक पंप नहीं चला। वह उसी तरह बंद है। उसका ट्रांसफारमर एवं अन्य उपकरण गायब होते जा रहे हैं। पाइप लाइन जगह जगह टूटी है। ग्राम पंचायत के पास उसे ठीक कराने के लिए बजट नहीं है। इसके अलावा पहले से तैनात चौकीदार व ग्राम प्रधान के आपसी विवाद के कारण भी पंप नहीं चल रहा है। एक पंप से आधा अधूरा पानी सप्लाई किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सुबह केवल एक घंटे पानी चलता है। इसके कारण गांव के ऊपरी भाग व मजरों बबुरी, बनपुरवा, चैनपुरवा , लोकापुर आदि में पानी के लिए हाहाकर मचा है। विभागीय अधिकारी पंप को पंचायत को हैंडओवर करके फुरसत हो गए हैं।

ग्राम समूह योजना इमिलिया तरहार

बारा के तरहार में ग्राम समूह इमिलिया तरहार एक कर्मचारी के सहारे छोड़ दिया गया है। एक कर्मचारी चौबीस घंटे ड्यूटी करने को विवश है। ऐसी दशा में जब कर्मचारी नहीं रहता अथवा निजी काम भोजन आदि के लिए चला जाता है तो पंप बंद हो जाता है। पंप बंद हो जाने से दर्जनों गांवो में पानी का संकट आ जाता है। कर्मचारी की कमी पर विभाग मौन है।

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  • Web Title:Twelve times the problem of drinking water