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5 मार्च, 2021|1:23|IST

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सैकड़ों प्रवासी मजदूरों का पालनहार बनी प्रयाग की वरुणा नदी

सैकड़ों प्रवासी मजदूरों का पालनहार बनी प्रयाग की वरुणा नदी

1 / 2फूलपुर तहसील के मैलहन झील से निकलकर वाराणसी के अस्सी घाट पर गंगा नदी में प्रयाग से काशी का मिलन कराने वाली वरुणा नदी, पीएम की लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही प्रवासी परदेसियों के साथ हजारों ग्रामीणों...

सैकड़ों प्रवासी मजदूरों का पालनहार बनी प्रयाग की वरुणा नदी

2 / 2फूलपुर तहसील के मैलहन झील से निकलकर वाराणसी के अस्सी घाट पर गंगा नदी में प्रयाग से काशी का मिलन कराने वाली वरुणा नदी, पीएम की लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही प्रवासी परदेसियों के साथ हजारों ग्रामीणों...

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फूलपुर तहसील के मैलहन झील से निकलकर वाराणसी के अस्सी घाट पर गंगा नदी में प्रयाग से काशी का मिलन कराने वाली वरुणा नदी, पीएम की लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही प्रवासी परदेसियों के साथ हजारों ग्रामीणों का पालनहार बनी हुई है। मनरेगा से खुदाई को लेकर सवा तीन करोड़ के स्वीकृत प्रोजेक्ट में एक करोड़ से अधिक का कार्य हो चुका है।

प्रतापपुर ब्लॉक के सत्रह गांवों से होकर गुजरने वाली यह नदी अब हजारों श्रमिकों के आजीविका की जीवनरेखा है। मनरेगा से खुदाई को 3 करोड़ 21 लाख 84 हजार की वित्तीय स्वीकृति महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लेखा सहायक अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रतापपुर ब्लॉक के सरायहरीराम से होकर पिलखिनी से होकर कुल 17 गांवों से गुजरने वाली वरुणा नदी की खुदाई को 3 करोड़ 21 लाख 84 हजार 700 रुपए के बजट की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

39 किलोमीटर लंबाई में के 17 किलोमीटर में हो रही खुदाई

वरुणा नदी का खुदाई कार्य सरायहरीराम, ठटा, सुल्तानपुर सर्पोशवीर, सुल्तानपुर लोढ़ीडीह, सोरों, बाबूपुरबेलों, कटेहरी, सदरेपुर, सरजूपट्टी, बघेडी, अनुआं, महरछा, पिडौना, चनेथू, थानापुर, झारी व पिलखिनी कुल 39.17 किलोमीटर खुदाई किया जाना है जिसका कार्य निरंतर संचालित है।

वरुणा नदी की खुदाई में 58771 मानव दिवसों का सृजन

खंड विकास अधिकारी प्रतापपुर अखिलेश तिवारी एवं वरुणा नदी पुनरुद्धार कार्य के नोडल अधिकारी बनाए गए लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता हौंसला प्रसाद मिश्र ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से खुदाई का कार्य चल रहा है। सदरेपुर गांव में यह कार्य पूर्ण हो चुका है तथा बाबूपुरबेलों में यह कार्य तकनीकी कारणों से अस्थाई रूप से रुका है। बाकी 15 गांवों में अनवरत मजदूर कार्य कर रहे हैं।

जानकारी दी कि 5 जुलाई, 2018 से 23 मई, 2020 तक 58771 मानव दिवसों का सृजन किया जा चुका है। 1 करोड़ 5 लाख 35 हजार से अधिक का श्रम सामग्री पर भुगतान भी हो चुका है।

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  • Web Title:The Varuna River of Prayag became the preserve of hundreds of migrant laborers