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गंगापार

कृषि भूमि पूर्वजों व आगामी पीढ़ियों की है, करें देखभाल

हिन्दुस्तान टीम,गंगापारPublished By: Newswrap
Sat, 13 Mar 2021 04:31 AM
कृषि भूमि पूर्वजों व आगामी पीढ़ियों की है, करें देखभाल

कृषकों के साथ वर्तमान में जो भी कृषि भूमि है वह सिर्फ उसके केयरटेकर भर हैं क्योकि यह उनको पूर्वजों ने अच्छी तरह से संरक्षित कर उन्हे सौंपा है। जिसे अच्छी देखभाल के साथ आने वाली पीढ़ियों को सौंपना है। इसलिए बहुत गंभीरता के साथ इसके स्वास्थ्य की देखभाल करें। यह बातें इफको के कोरडेट स्थित चौपाल भवन में कोआपरेटिव रूरल डेवलेपमेंट की ओर से आयोजित जायद फसल विचार गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि कोरडेट प्रबंध समिति के अध्यक्ष शीशपाल सिंह ने कही।

विशिष्ट अतिथि आरपी सिंह बघेल ने कहा कि हम लोग जो अंधाधुंध रसायनिक पदार्थों का उपयोग अपने खेतों में कर रहे हैं वह मृदा की उर्वरा शक्ति को क्षरण करने की ओर लें जा रहे हैं। इससे बचना होगा नहीं तो आने वाली पीढ़ी के समक्ष पेट भरने का संकट खड़ा हो जायेगा। केवीके के वैज्ञानिक डा.मनोज कुमार सिंह ने कहा कि जायद फसलों को वैज्ञानिक ढंग से करना होगा जिसमें जैव उर्वरक का अधिकतम प्रयोग करना होगा। डा.हरिश्चन्द्र ने कहा कि जिस प्रकार हमारा स्वास्थ्य खराब होता है तो हम चिकित्सक के पास जाते है उपचार कर स्वस्थ होते है तो मृदा के स्वास्थ्य की जांच क्यों नहीं कराते। मृदा संरक्षण के लिये गोबर की खाद का प्रयोग आवश्यक है। डा.एचएम शुक्ला ने नैनों फर्टिलाइजर पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता प्राचार्य डीपीएस तोमर ने कोरडेट की स्थापना व कार्य पर विस्तार से बताया। संचालन नंद जी जायसवाल ने किया। गोष्ठी में अभय सिंह उमरी व रामराज भरौटी, अरुण शुक्ला बेल्हाबांध व निशा पटेल ने अपनी उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी। मौके पर मुकेश तिवारी, अमित कुमार, इन्द्रराज सिंह आदि मौजूद रहे।

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