Somewhere in Somnath the lives of people going to Yamuna - यमुनापार में तेजी से फैल रहा है स्मैक का अवैध कारोबार DA Image
17 नबम्बर, 2019|3:48|IST

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यमुनापार में तेजी से फैल रहा है स्मैक का अवैध कारोबार

यमुनापार में स्मैक का कारोबार तेजी पैर पसार रहा है। क्षेत्र की युवा पीढ़ी ही नहीं बुजुर्ग तक स्मैक के लती होते जा रहे हैं। स्मैक के कारोबार में झोलाछाप डॉक्टरों व भू माफियाओं की जोड़ी ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। इनके एजेंट पहले स्मैक का आदी बनाते हैं, फिर जमीन लिखवा लेते हैं और अचानक उसकी मौत हो जाती है। सबकुछ इतनी बारीकी से घटता है कि परिजन तक भांप नहीं पाते हैं। जब तक जान पाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

यमुनापार में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। नोटबंदी के बाद भू माफियाओं का कारोबार मंदा हो गया है। शहरी क्षेत्रों के बाद स्मैक के कारोबारियों की निगाह यमुनापार के ग्रामीण अंचलों तक पहुंच गई। तीनों ने मिल कर नया खेल खेलने का निश्चय कर लिया। स्मैक अपना कारोबार विद्यालयों, महाविद्यालयों के आसपास, कस्बों से हटकर गांवों में शुरू कर दिया है। इसमें उनका सहयोग कर रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर और भू माफिया। इलाके में इस टीम के एजेंट पसरे हैं। समाज में नशे के आदियों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। उनको धीरे धीरे स्मैक का चस्का लगाते हैं। जब वह पूरी तरह नशे का आदी हो जाता है तो भू माफिया अपना खेल शुरू कर देता है। नशे के आदी युवक या बुजुर्ग को सब्जबाग दिखा कर उनकी जमीन लिखवा लेता है। यहां तक कि उनको पेमेंट तक नहीं किया जाता है। बैंक के माध्यम से फर्जी भुगतान दिखा दिया जाता है। जब वह धन की निकासी करने जाता है तो खाता खाली पाकर निराश अपने घर लौट जाता है। अंत में मौत को गले लगा लेता है। यह भी साफ नहीं होता है कि मौत को गले स्वयं लगा लेता है अथवा उसकी हत्या कर दी जाती है। उसके बच्चों को धमकाकर जमीन पर कब्जा कर लिया जा रहा है। घूरपुर, कौंधियारा, जारी, बारा, शंकरगढ़, लालापुर, करछना सहित लगभग पूरे यमुनापार में स्मैक के कारोबारी फैल चुके हैं। जमीन हड़पने की घटना घूरपुर के बुंदावा, कांटी, करमा और कोंधियारा के जारी, बरेठिया आदि गांवों में हो चुकी है।

2= लाचार है प्रशासन

स्मैक के कारोबारियों की तिकड़ी की पहुंच उच्चाधिकारियों से लेकर सफेदपोश तक हैं। धन बल व बाहुबल पर सफेदपोश के साथ फोटों खिचवा लेते हैं और उसी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। सिविल पुलिस, क्राइम ब्रांच, एसटीएफ और एलआईयू तक उन पर हाथ डालने से कतराती है।

नाम की गोपनीयता पर इन विभागों के अधिकारियों ने बताया कि यह रोग प्रयागराज जनपद में तेजी से फैल चुका है। कतिपय अधिकारियों तक के बच्चे इनकी गिरफ्त में हैं। इसके बावजूद लाचार हैं। इसमें आईजी या डीआईजी स्तर के अधिकारी हाथ डालेंगें तभी कामयाबी मिल सकती है।

3= लाइलाज है यह नशा

इस संबंध में सीएचसी सी जसरा के अधीक्षक डॉक्टर तरुण पाठक का कहना है स्मैक का नशा लाइलाज है। एक बार यदि कोई इसका आदी हो गया तो उससे नहीं उबर सकता है। नशा न मिलने पर उसके शरीर मे ऐंठन शुरू हो जाती है। जब तक वह स्मैक नहीं पाएगा पागलों की तरह ब्यवहार करता रहेगा। इसका इलाज लंबा व काफी खर्चीला है। नशे का आदी युवक जब स्वयं दृढ़ निश्चय करेगा तभी छोड़ सकता है।

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