पानी का रास्ता देख रहीं सूखी नहरें, किसान कैसे डालें नर्सरी
पालपट्टी, हिन्दुस्तान संवाद। इस समय भीषण गर्मी का सिलसिला जारी रहने से पेयजल के लिए
इस समय भीषण गर्मी का सिलसिला जारी रहने से पेयजल के लिए पशु, पक्षी, वन्य जीव प्यास बुझाने के लिए जलाशयों के तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं किसान धान की नर्सरी डालने के लिए पानी की राह देख रहे हैं। लेकिन नहरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। परिणाम स्वरुप न तो मवेशियों को पानी मिल पा रहा है और न ही किसान अपनी धान की नर्सरी डाल पा रहे हैं। क्षेत्र के बेलन नहर से जुड़े रजबहा माइनरों में पानी के जगह धूल उड़ रही है। जिसके चलते लोगों की परेशानियां बढ़ी हुई है।
पानी की कमी
सुजनी चैनपुरवा गांव निवासी राहुल पाल ने बताया कि बेलन नहर के सुजनी रजबहा और माइनरों में पानी न छोड़े जाने से पालतू जानवर और वन्य जीव प्राणियों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वहीं नहर में पानी न छोड़े जाने व जल स्तर नीचे चले जाने से इंडिया मार्का लगे हैंडपाइप पानी उगलना बंद कर दिए हैंं। जिसके चलते लोगों को पेयजल के लिए भी जूझना पड़ रहा है। किसान के धान की नर्सरी पीछड रही है जिसका प्रभाव धान के उत्पादन पर भी पड़ेगा।
किसानों की समस्याएं
कुछ इसी तरह का हाल क्षेत्र के लोहरा पंप का भी है। इस नहर से धूल तो नहीं उड़ रही है पर धान की नर्सरी डाल पाने लायक पानी भी नहीं आ रहा है। इस गांव से जुड़े कोटर, रेंगा, चंद्रोदया, कौहट, बड़ि्डहा, माझियारी आदि गांवों के रजनीश तिवारी, ओंकार नाथ, राजेंद्र आदि सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि, यह पंप जब से स्थापित हुआ है तब से आज तक कभी भी समय पर और पर्याप्त पानी नहीं दिया है। जिसके चलते किसान की खरीफ व रवी दोनों फसल लगातार पीछड जा रही हैं। अब जब नहर में पर्याप्त पानी होना चाहिए था तब इस पंप से संचालित नहरों में नहर गिला करने के लिए पंप संचालकों द्वारा पानी छोड़ा जा रहा है।
नहर विभाग का ध्यानाकर्षण
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने नहर विभाग का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सूखी पड़ी नहरो में पानी डाले जाने की मांग की है।
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