सिलेंडर न मिलने से मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाने को मजबूर
Gangapar News - गौहनिया, हिन्दुस्तान संवाद। ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी कमी के चलते गृहिणियों
ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी कमी के चलते गृहिणियों और होटल कारोबारियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।पिछले कई वर्षों से बंद पड़े पारंपरिक चूल्हे अब फिर से उपयोग में लाए जा रहे हैं, जिससे दैनिक जीवन में नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। रसोई गैस किल्लत के चलते इन दिनों गांवों और बस्तियों में महिलाएं मजबूरी में लकड़ी और गोबर के उपलों से चूल्हा जलाकर खाना बना रही हैं। खासकर 20 से 25 वर्ष की आयु वर्ग की कई युवतियां, जिन्हें पहले चूल्हे पर खाना बनाने का अनुभव नहीं था, अब इस पारंपरिक तरीके को सीखने को मजबूर हैं।
धुएं के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं।राजमार्गों के किनारे गौहनिया,कांटी और आस पास के छोटे-बड़े ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों को भी गैस की कमी का बड़ा असर झेलना पड़ रहा है। सिलेंडर नहीं मिलने से उन्हें कोयले की भट्ठी पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे समय, मेहनत और लागत तीनों में काफी वृद्धि हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि गैस सिलेंडर बुक करने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। कई बार कॉल करने पर हाकरों से संपर्क नहीं हो पाता, और कई बार तकनीकी कारणों से भी बुकिंग संभव नहीं जैसे संदेश मिलते हैं। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और कई बुकिंग दिनों तक लंबित पड़ी रहती हैं।लकड़ी और गोबर के उपलों की बढ़ी मांगगैस संकट के चलते गांवों में लकड़ी और गोबर के उपलों की मांग भी अचानक बढ़ गई है, लेकिन इनकी उपलब्धता भी सीमित है। परिणामस्वरूप, महिलाओं और होटल कारोबारियों को इन्हें जुटाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और गैस आपूर्ति को सुचारू बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वितरण व्यवस्था को सक्रिय कर समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, तो इस समस्या से काफी हद राहत मिल सकती है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


