बोले प्रयागराज: कुंओं का खत्म हो रहा अस्तित्व, तालाबों में फैल रही गंदगी से बढ़ रहा प्रदूषण
Gangapar News - नष्ट होते जलस्रोत लगभग दो या तीन दशक पहले गांवों में जल के मुख्य
नष्ट होते जलस्रोत लगभग दो या तीन दशक पहले गांवों में जल के मुख्य श्रोत कुंए और तालाब होते थे। कुंए का पानी लोग पीने के लिए प्रयोग करते थे तो तालाब के पानी का प्रयोग सिंचाई सहित अन्य आवश्यक आवश्यकताओं के लिए किया जाता था। पशुओं के पीने, कपड़े धुलने आदि कार्यों में तालाब के पानी का उपयोग होता था। गांव के लोग कुंओं सहित तालाबों की सफाई का भी ध्यान रखते थे लेकिन समय के साथ बड़ा बदलाव होने लगा। पीने के पानी के लिए हैंडपंप लगाए गए तथा कुछ स्थानों पर नल द्वारा पेयजल की आपूर्ति की जाने लगी।
इसी तरह खेतों की सिंचाई नहरों से की जाने लगी तथा किसानों ने अपने खेतों में निजी नलकूप लगा लिया। इन सरल और आधुनिक सुविधाओं के बाद धीरे धीरे कुंओं का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया। खाली पड़े तालाबों के किनारे लोगों ने मकान बना लिया या वे गंदगी के शिकार बन गए। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले गांव के हर मुहल्लों में एक कुंआ होता था जिसके पानी का प्रयोग लोग पीने, नहाने व खाना बनाने में करते थे। इतना ही नहीं गांव के बाहर खेतों में किसानों द्वारा कुएं बनवाये जाते थे जिनके पानी का प्रयोग खेतों की सिंचाई के लिए किया जाता था। चमड़े का बड़ा थैला जिसे मोट कहा जाता था उसमें मोटा रस्सा बांधकर कुएं में लटकाया जाता था जिसमें भरा पानी बैलों द्वारा खींचकर खेतों तक पहुंचाया जाता था। ग्रामीण क्षेत्र में इस विधि को पुर या पुरवट कहा जाता था। कहीं कहीं कुओं में रहट लगाते थे जिसका पानी बैलों द्वारा खींचकर खेतों तक पहुंचाया जाता था। बैलों के द्वारा ही खेतों की जुताई, बुआई भी की जाती थी। बाद में लोगों ने बैल रखना भी बंद कर दिया, नहर और निजी नलकूप लग जाने के बाद सिंचाई की ये विधि भी समाप्त हो गई और कुंओं का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। तालाबों की बात की जाय तो हर गांव में एक या एक से अधिक तालाब होते थे। इनके पानी के उपयोग में कमी आने के बाद कहीं कहीं इन पर अवैध अतिक्रमण किया गया तो कहीं इनमें गंदगी भर गई। कुछ दिनों पहले क्षेत्र के चिल्ली चकिया, सेमरी तालुका पुरवा सहित अन्य स्थानों पर सरकार द्वारा तालाबों की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है। कुछ गांवों में एक तालाब को आदर्श तालाब का रूप देकर उसे विकसित किया गया लेकिन अधिकतर तालाबों में पनसोखवा सहित अन्य खर पतवार ने कब्जा कर लिया है। कुछ तालाबों में जूठे पत्तल सहित कूड़ा करकट फेंक दिया गया जिससे प्रदूषण फैल रहा है और लोग गंदगी से फैलने वाली बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। दानपुर में अब भी कुंए के पानी का हो रहा उपयोग गांवों के अधिकतर कुंए समय के साथ पट गए हैं लेकिन दानपुर की यादव बस्ती में बने पुराने कुंए के पानी का आज भी उपयोग हो रहा है। कुंए के ठीक सामने निवास करने वाले बनारसी यादव ने बताया कि हम लोग इस कुंए का पानी पीने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। गांव में किसी परिवार के बड़े बूढ़ों की मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार के पुरूष व महिलाएं इसी कुएं पर स्नान कर दिवंगत आत्मा को जल देते हैं। उन्होंने कहा कि कुंए के पानी का इस्तेमाल कुछ परिवार के लोग ही करते हैं इसलिए पानी कम निकलने के कारण कभी खराब हो जाता है। तालाबों के पुनरोद्धार की आवश्यकता लोगों का मानना है कि तालाबों का पुनरोद्धार होना बहुत जरूरी है। तालाबों के पानी का सही उपयोग न होने के कारण उनमें गंदगी भर गई हैं जिससे तालाबों का पानी काला और प्रदूषित हो गया है। सरकार को चाहिए कि इसके लिए धन आवंटित कर ब्लॉक, किसी कार्यदायी संस्था या प्रधान के माध्यम से इन तालाबों की सफाई सुनिश्चित करें जिससे प्राचीन धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। इन तालाबों द्वारा मत्स्य पालन, सिंघाड़े की खेती या अन्य उपयोग द्वारा आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। बलापुर के अमृत सरोवर में हो रहा मत्स्य पालन क्षेत्र के बलापुर गांव में बने अमृत सरोवर को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दे दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे सरोवर का स्तर खराब हो गया है। यदि किसी अन्य तालाब को पट्टे पर दिया गया होता तो इसी बहाने उसका जीर्णोद्धार हो जाता। अमृत सरोवर में मत्स्य पालन उचित नहीं है। जिम्मेदारों को इस पर ध्यान देना चाहिए। बोले जिम्मेदार सरकार द्वारा तालाबों पर अवैध रूप से हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश के बाद तेजी से कार्रवाई की जा रही है। तालाबों से अवैध कब्जे हटाये जा रहे हैं तथा उनके सुन्दरीकरण का कार्य भी हो रहा है। तालाबों को उनके मूल स्वरूप में लाने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। -अमित मिश्रा, बीडीओ, कौंधियारा कुंए और तालाब हमारी पुरानी धरोहर हैं। उनको संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। सरकार द्वारा तालाबों से अवैध कब्जे हटाकर उनके मूल स्वरूप में ले आने का कार्य शुरू है। उन्हें सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए ब्लॉक स्तर पर जो भी संभव होगा किया जाएगा। -इंद्रनाथ मिश्र, ब्लॉक प्रमुख कौंधियारा ------------------------------ हमारी भी सुनें हमारे गांव पंचायत बलापुर में सभी तालाबों को स्वच्छ रखने का पूरा प्रयास किया गया है लेकिन गांव में बनाये गए अमृत सरोवर को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दे दिया गया है जिससे पूरा तालाब कीचड़ और गंदगी युक्त हो गया है। प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है। -नीलम पथिक, अध्यक्ष प्रधान संघ करमा के पूरब में स्थित पुराने डोलिया तालाब को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया गया है जिसमें वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इसका नाम भी शहीद ललऊ मिश्र के नाम पर रखा गया है। अन्य तालाबों का भी पुनरोद्धार होना चाहिए। -अमरीश जायसवाल, प्रधान करमा गांवों में तालाबों की स्थिति बहुत ही खराब है। उनमें फैली गंदगी लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है इसलिए सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। तालाबों को सुरक्षित और संरक्षित रखना बहुत ही आवश्यक है। ये हमारी सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक हैं। -अमर बहादुर सिंह, पूर्व प्रधान करमा तालाबों के द्वारा सिंचाई सहित अन्य कार्य होते थे। बरसात के पानी से तालाब भर जाते थे जिससे भूगर्भ जल का स्तर भी सुरक्षित रहता था। जब से तालाबों का संरक्षण बंद हो गया हमारा भूगर्भ जलस्तर भी नीचे होता जा रहा है जिससे गर्मी में पानी की समस्या हो रही है। -दीपक द्विवेदी, पूर्व प्रधान हथिगन कुंए और तालाब हमारी प्राचीन धरोहर के साथ संस्कृति के संवाहक भी रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये जल के प्रमुख स्रोत रहे हैं। इनकी उपेक्षा से लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। -जीपी सिंह, यमुनापार विकास समिति कुंए तो पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं लेकिन तालाबों की समुचित देखरेख न होने से वे गंदगी का शिकार हो रहे हैं जिससे उनमें एकत्र पानी खराब हो रहा है। इससे प्रदूषण बढ़ने और बीमारी फैलने की संभावना बढ़ सकती है। संबंधित विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए। -अनिल कुमार शुक्ल, दानपुर ग्रामीण क्षेत्र में तालाबों की स्थिति बहुत खराब है। तालाबों में पानी संचित करने और उसकी निकासी की सही व्यवस्था न होने से बरसात का पानी उसी तालाब में वर्ष भर जमा रहता है। सही उपयोग न होने और खर पतवार के दुष्प्रभाव से वह खराब हो रहा है। -धर्मचंद्र पटेल करमा तालाबों की खुदाई करवाकर यदि उसे निजी हाथों में सौंप दिया जाय और उसे व्यावसायिक रूप दे दिया जाय तो इससे तालाब का अस्तित्व भी बचा रहेगा और उसके माध्यम से ग्राम पंचायत की अतिरिक्त आय भी होगी जिसका उपयोग विकास के कार्यों में किया जा सकता है। -हरिप्रताप सिंह चंद्रभान का पूरा गांव में तालाबों की स्थिति बहुत खराब है। कुछ पट चुके हैं तो कुछ गंदगी का शिकार हो गए हैं। देवरी का तालाब इसका जीता जागता उदाहरण है। इनको मूल स्वरूप में ले आकर इनको संरक्षित करना बहुत ही आवश्यक है जिससे वे अपने असली स्वरूप में वापस आ सकें। -रामनाथ त्रिपाठी, देवरी अमृत सरोवरों के तर्ज पर ही गांवों में स्थित अन्य तालाबों का भी स्वरूप बदलना चाहिए ताकि वे अपने पुराने स्वरूप में वापस आ सकें। कुएं व तालाब ग्रामीण लोगों की पानी की आवश्यकता को पूरा करने के साथ गांव की शोभा भी थे जिसे वापस लाना बहुत जरूरी है। -भानू मिश्रा, करमा

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




