बोले प्रयागराज : सुरम्य पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां, मांडव्य तपोभूमि सबकुछ है फिर भी नहीं बन सका पर्यटन क्षेत्र
संक्षेप: Gangapar News - मांडा राजमहल और मां मांडवी देवी धाम जैसे ऐतिहासिक स्थलों के बावजूद, मांडा क्षेत्र का पर्यटन विकास अधूरा है। कर्णावती नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी से...
मांडा मांडा राजमहल से तीन किमी दक्षिणी पूर्वी पहाड़ पर स्थित सुरम्य मांडव्य तपोभूमि व कर्णावती नदी का उद्गम स्थल, मांडा राजमहल से दो किमी दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित मां मांडवी देवी धाम के चलते मांडा ग्राम पंचायत का गठन हुआ। यही नहीं मध्य में स्थित मांडा राजमहल के चारों ओर विंध्य पर्वत माला की शाखाएं हैं और इन्हीं के मध्य विकास खंड मांडा का आबादी के नजरिये से सबसे बड़ी ग्राम पंचायत मांडा खास और जनपद का पहला तथा कानपुर देहात के बाद प्रदेश का दूसरा नगर पंचायत भारतगंज स्थित है। इतना सबकुछ होने के बाद भी पर्यटन के लिहाज से इसे न तो विकसित किया गया और न ही यह पर्यटन के नक्शे पर ही आ सका।
अगर इस पर शासन का ध्यान जाए तो न केवल क्षेत्र का विकास होगा बल्कि रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। मांडा राजमहल के दक्षिण व पूर्वी दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र में 108 सिद्ध पीठों में एक मां मांडवी देवी धाम तथा वृहदारण्यक और सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद की ऋचाओं में वर्णित मांडव्य ऋषि की तपोभूमि अपने आपमें पर्यटक स्थल की अपार संभावनाओं से युक्त तो है ही। इसके अलावा मांडा राजमहल के उत्तर दशमियहवा पहाड़, बाबा मस्तान शाह का सुप्रसिद्ध मजार, राजमहल के पूरब पहाड़ पर स्थित बाबा बूढ़ेनाथ महादेव व निरंजनी पंचायती अखाड़े के तपोभूमि से सात किमी पूरब तक घिरा विशाल पहाड़ी क्षेत्र अपने आपमें बड़े पर्यटक स्थल की संभावनाओं से युक्त है। राजमहल के पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में जफरा व मसौली पहाड़ भी पर्यटन स्थल के लिए बेहतरीन स्थान माना जाता है। मांडा ने वीपी सिंह के रूप में प्रदेश को मुख्यमंत्री और देश को प्रधानमंत्री दिया। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे केएन सिंह भी मांडा के ही सपूत थे। इसके अलावा तमाम केंद्रीय मंत्री, सांसद व विधायक भी इस क्षेत्र से हुए, लेकिन मांडा के पहाड़ी क्षेत्र के विकास या पर्यटन स्थल के बारे में जन प्रतिनिधि केवल वायदे करते रहे, वायदों पर कभी अमल न किया जाना, क्षेत्र का दुर्भाग्य रहा। सर्वप्रथम 1977 के चुनाव में जनेश्वर मिश्र ने अपनी जनसभा में मांडा क्षेत्र को पर्यटक स्थल बनाने का सपना दिखाया। इसके बाद से अब तक इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस सपने को आगे बढ़ाते रहे, लेकिन साकार रुप में नामालूम कब यह सपना फलीभूत हो पाएगा। मांडव्य तपोभूमि से निकली है कर्णावती नदी मांडव्य तपोभूमि के पहाड़ी कोख से निकली कर्णावती नदी मांडा क्षेत्र के एक दर्जन ग्राम पंचायतों मांडा खास, गिरधरपुर, सिकरा, बेदौली, भींस, महुआंवकला, राजापुर, धरांवनारा, सैबसा, भौंसरानरोत्तम, बसकड़ी आदि के लंबे भूभाग को सिंचित करते हुए मिर्जापुर जनपद के गैपुरा क्षेत्र के भटेवरा गाँव के समीप मां गंगा में मिलकर आगे की यात्रा तय करती है। पिछले सात वर्षों में कर्णावती नदी के साफ सफाई के नाम पर प्रयागराज विकास भवन द्वारा मांडा के दर्जनों ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये आबंटित किये गये, लेकिन भारी भरकम धनराशि मिलने के बाद भी विभिन्न गांवों में कर्णावती नदी का रास्ता आज भी बाधित ही है, जिससे गांवों में कर्णावती नदी के माध्यम से हरित क्रांति लाने की सरकारी कवायद पर ग्रहण लगा हुआ है। मांडा के पहाड़ों में रोजगार की असीम संभावनाएं मांडा राजमहल के चतुर्दिक फैले विशालकाय पहाड़ी भूभाग को रेनूकूट, सोनभद्र, अनपरा की तरह विभिन्न कंपनियों की स्थापना कर सरकार हजारों बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर निर्मित कर सकती है। सरकारी, अर्ध सरकारी या पूंजीपतियों के सहयोग से इस पहाड़ी क्षेत्र का विकास कर तमाम बेरोजगारों के चेहरों पर खुशहाली लायी जा सकती है। वर्ष 2009 में कुछ कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मांडा के पहाड़ी क्षेत्र का सर्वे भी किया था, लेकिन सर्वे के बाद बात आगे न बढ़ पाने से लोगों को निराश होना पड़ा। रोजगार सृजन के वर्तमान सरकार के कार्यप्रणाली से स्थानीय लोगों में एक बार फिर मांडा क्षेत्र के पहाड़ी भूभाग को विकसित करने की संभावनाएं बढ़ गयी हैं। बोले जिम्मेदार मांडा से जुड़ा होने के कारण समूचे क्षेत्र से आत्मिक लगाव है। मांडा क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए इसके लिए प्रदेश सरकार के जिम्मेदार लोगों और अधिकारियों से वार्ता जारी है। -तपेंद्र प्रसाद, सेवानिवृत्त आईएएस व पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मांडा के चफला व मांडव्य तपोभूमि क्षेत्र को विकसित कर पर्यटन स्थल बनाने के लिए जन प्रतिनिधियों से निरंतर निवेदन किया जा रहा है। शीघ्र ही इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे। -डा असद अली, ग्राम प्रधान, मांडा खास ----------------------- हमारी भी सुनें मांडा क्षेत्र के विभिन्न पहाड़ों को पर्यटन स्थल या औद्योगिक स्वरूप प्रदान कर तमाम बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। इस पर यदि शासन ध्यान दे तो रोजगार के साथ सरकार का भी राजस्व बढ़ेगा। -दिलीप तिवारी, समाजसेवी, नहवाई मांडा क्षेत्र की उर्वरा धरती ने देश को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तक दिया, लेकिन मांडा के पहाड़ी क्षेत्र आज तक पहाड़ी जंगल ही रह गये, यह इस क्षेत्र का दुर्भाग्य है। वरना इतने बड़े लोग जहां भी हुए आज वो क्षेत्र देश में पहचान बना चुका है। -दिनेश कुमार पांडेय, समाजसेवी मांडा में ही रोजगार के तमाम अवसर होते हुए भी उपेक्षा के कारण इस क्षेत्र के अधिकतर युवाओं को रोजी रोटी के लिए परदेश भागना पड़ता है। जबकि सरकार थोड़ा भी ध्यान दे तो पर्यटन क्षेत्र के रूप में पूरा इलाका विकसित हो सकता है। -दीनानाथ कुशवाहा, शिक्षक उपेक्षा हर स्तर पर हुई, जिससे अपने क्षेत्र में ही रोजगार के तमाम अवसर आज भी दबे पड़े हैं। वर्तमान सरकार को मांडा क्षेत्र के पहाड़ी भूभाग को विकसित कर रोजगार परक बनाना चाहिए। इसके लिए ठोस योजना की दरकार है। -अभिषेक कुमार, शिक्षक अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। मांडा के चतुर्दिक पहाड़ी भूभाग को पर्यटन या औद्योगिक इकाई के रुप में विकसित कर सरकार तमाम परिवारों के शिक्षित बेरोजगारों के चेहरों पर मुस्कान ला सकती है। बस थोड़ा सा प्रयास करना होगा। -प्रवीण कुमार प्रधानाचार्य हमारे राजा मांडा ईमानदार राजनेता थे। केवल अपने गृह क्षेत्र पर ध्यान देकर वे देश के साथ अन्याय नहीं करना चाहते थे। हम लोग अभी तक उसी ईमानदारी के चलते यथावत जीवन गुजार रहे हैं। वरना बहुत कुछ हो गया होता। -देवराज कुशवाहा, शिक्षक मांडा के पहाड़ों को विकसित कर सरकार तमाम परिवारों को रोजगार के अवसर प्रदान कर सकती है। इसके लिए हमारे जन प्रतिनिधियों को भी पहल करना चाहिए। अब सरकार का जोर भी है पर्यटन पर। ऐसे में बहुत कुछ यहां करने को है। -ज्योति केशरी, शिक्षिका सरकार हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाश रही है। मांडा क्षेत्र के चारों ओर फैले विशाल जंगली क्षेत्र पर भी सरकार को ध्यान देते हुए विकसित कर रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए। तभी यहां पलायन रुकेगा और लोगों को रोजगार मिलेगा। -मिथिलेश मौर्या, भाजयुमो मांडा, प्रयागराज मांडा क्षेत्र के पहाड़ी भूभाग को यदि विकसित कर पर्यटन या औद्योगिक इकाई से सरकार जोड़ दे, तो तमाम युवाओं को रोजगार माल सकता है। साथ ही पूरा क्षेत्र अपने घर रहकर ही परिवार का पालन पोषण कर सकता है। -दया शंकर शुक्ल, तिसेनतुलापुर, पूर्व ग्राम प्रधान व समाजसेवी मांडा क्षेत्र के विकास के लिए बहुत ही जरुरी है कि मांडा पहाड़ी भूभाग को पर्यटन या उद्योग से जोड़ा जाये। इसके लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को इसकी पहल करनी चाहिए अपने अपने सदन में तो बहुत कुछ हो सकता है। -श्रीकांत शुक्ल, समाजसेवी क्षेत्र के पहाड़ी भूभाग में ही रोजगार के तमाम अवसर छिपे हैं। जरुरत है कि दबे अवसर को रोजगार के रूप में सरकार प्रस्फुटित करे, जिससे क्षेत्र के युवाओं को रोजी रोटी के लिए परदेश न जाना पड़े। इससे पलायन रुक जाएगा। -अरुण कुमार द्विवेदी, सिकरा

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