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22 सितम्बर, 2020|8:19|IST

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घर पहुंचने पर हो गए बेरोजगार, फिर परदेस की तैयारी

घर पहुंचने पर हो गए बेरोजगार, फिर परदेस की तैयारी

परदेस से घर लौटने के बाद प्रवासी लोगों की मुश्किलें और भी बढ़ गई, उन्हें न तो राशन की दुकान से उन्हे गल्ला मिला और न ही शासन से आया किट मिल पाया जिससे वह आर्थिक तंगी के शिकार हो गए, ऐसी दशा में वह फिर से टिकट कटाकर मुम्बई जैसे महानगरों की ओर जाने के मूड में आ गए हैं।

बरसैता गांव के उमेश कुमार निषाद माहभर पहले कोरोना बीमारी की वजह से सूरत से लौटे हैं, वह एक कंपनी में काम करते रहे, सोचा था लाकडाउन में घर पहुंचने पर उनकी परेशानी कम हो जाएगी, लेकिन वह घर आने पर आर्थिक तंगी के शिकार हो गए। इसी गांव के राजेश निषाद, बबलू निषाद, उमेश निषाद, बल्लू निषाद, सहित कई ने बताया कि लाकडाउन होने की वजह से वह सभी परिवार सहित आ गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल सकी। खेती बारी न होने तथा स्थानीय स्तर पर मनरेगा से कार्य न मिलने पर अब वह क्या करें, कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। ऐसी दशा में परदेस को पलायन करने पर मजबूर हैं।

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  • Web Title:On reaching home I became unemployed then ready for foreigners