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मौनी अमावस्या पर आज विशेष योग-संयोग में लगाई जाएगी आस्था की डुबकी

मौनी अमावस्या पर आज विशेष योग-संयोग में लगाई जाएगी आस्था की डुबकी

संक्षेप:

Gangapar News - प्रयागराज के त्रिवेणी या समुद्र में मौन होकर स्नान से दस अश्वमेध यज्ञ के फल

Jan 17, 2026 03:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गंगापार
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सनातन संस्कृति के हिन्दू धर्म में वैसे तो सभी अमावस्या को खास माना गया है, किन्तु माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखना काफी शुभ माना गया है।इस दिन पवित्र नदियों और त्रिवेणी में स्नान और दान पुण्य का विशेष महत्व होता है। ज्योतिष विशेषज्ञ पं ध्रुव कुमार शास्त्री ने बताया कि माघी अमावस्या पर ब्रह्मा जी के मानस पुत्र मनु ऋषि ने मौन रहकर तप किया था, इस वजह से इस अमावस्या का नाम मौनी अमावस्या पड़ा। इस दिन अपने पूर्वजों यानी पितरों के लिए किए गए श्राद्ध-तर्पण और धूप-ध्यान से उन्हें तृप्ति मिलती है।

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पितर देवता प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं, जिससे घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है। माना जाता है कि मौन रहने से मन की नकारात्मकता दूर होती है और मन शांत होता है। इस साल की मौनी अमावस्या पर तीन विशेष योग भी रहेंगे। सर्वार्थ सिद्ध योग,याजिज योग रहेगा।इस दिन पूर्वा साढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का योग भी बन रहा है। इन नक्षत्रों में त्रिवेणी में स्नान,ध्यान, पूजा, जप, तप एवं ध्यान, दान,पुण्य के लिए बहुत ही शुभ माने जाते हैं। मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व पं ध्रुव कुमार शास्त्री ने बताया कि मौनी अमावस्या को आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने वाला स्नान पर्व है। इस दिन मौन व्रत के साथ त्रिवेणी स्नान से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है और भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा की जाती है। साथ ही पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। मौनी अमावस्या को मन पर काबू करने वाला माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन लिया गया संकल्प हमारे जीवन में लंबे समय तक बना रहता है। इस दिन का व्रत करने से जीवन में शांति और स्थिरता भी आती है। अमावस्या पर त्रिवेणी स्नान करने का पुण्य काल पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 17 जनवरी को रात 11.53 से प्रारंभ होकर 18 जनवरी रात 01.9 बजे तक रहेगी। प्रयागराज के संगम तट पर स्नान का पुण्यकाल भोर 4.22 से सूर्यास्त तक अश्वमेध यज्ञ के बराबर विशेष फलदाई रहेगा।