महाशिवरात्रि पर 19 साल बाद बन रहा है महासंयोग
Gangapar News - छह ग्रहों का पुनरावृत्ति योग, सूर्य, बुध, शुक्र, राहु, केतु, चंद्रमा का सर्वार्थ सिद्धि योग

देवाधिदेव महादेव की उपासना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि रविवार 15 फरवरी को विभिन्न शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर 19 साल बाद दुर्लभ पुनरावृत्ति योग का निर्माण हो रहा है जिसमें 6 ग्रहों के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञ पं उमेश शास्त्री दैवज्ञ ने बताया कि 19 साल बाद रविवार 15 फरवरी को छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इसके पूर्व 2007 में महाशिवरात्रि के दिन सूर्य, बुध, शुक्र, राहु, केतु, चंद्रमा एक साथ मौजूद थे। प्रमुख ग्रहों के युति योग में भगवान शिव की आराधना का प्रकृति व मनुष्य पर विशेष प्रभाव रहता है।
इसके अलावा महाशिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभसंयोग रहेगा। शाम 07:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। शास्त्रों में श्रवण नक्षत्र को शिव साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। साथ ही इसी दिन शिववास योग का संयोग भी है, जो रुद्राभिषेक के फल को कई गुना बढ़ा देता है। चार प्रहर पूजा से मिलेगी शिव की कृपा महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का खास विधान एवं महत्व होता है। चार प्रहर में प्रदोष काल, निशिथ काल, मध्य रात्रि और ब्रह्म मुहूर्त का समावेश है। 15 फरवरी को प्रथम प्रहर प्रदोष काल शाम 6:10 बजे से रहेगा। दूसरा प्रहर रात्रि 9:40 बजे से शुरू होगा। तीसरा प्रहर मध्य रात्रि 12:41 बजे से तथा चौथा प्रहर ब्रह्म मुहूर्त का रात 3:18 बजे से सुबह 5 बजे तक रहेगा। महानिशा काल का यही वह समय है, जिसमें ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भी भगवान महाकाल की महापूजा की जाती है। महाशिवरात्रि का गोचर काल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन सोमवार 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे होगा। चूंकि चतुर्दशी प्रदोष काल के साथ निशीथ काल में भी मिल रही है, ऐसे में महाशिवरात्रि रविवार 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शाम 7:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा जो अगले दिन 16 फरवरी को सुबह 8:47 बजे तक रहेगा। व्यतिपात योग पूरे दिन बना रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 12:59 बजे से 2:41 तक रहेगा। इसी दिन हुआ था पार्वती-शिव का विवाह वैसे तो प्रत्येक संवत्सर माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी एवं चतुर्दशी के मध्य मासिक शिवरात्रि पड़ती है।लेकिन फाल्गुन माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। शिव महापुराण के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही माता पार्वती का महादेव से विवाह हुआ था। इस दिन की गई पूजा-अर्चना, जप और व्रत से महादेव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह सात से शाम 7:48 तक 15 फरवरी को सुबह 7:00 बजे से शाम 7:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। महाशिवरात्रि पर बुध, शुक्र व राहु कुंभराशि में विद्यमान रहेंगे। जबकि केतु सिंह राशि में स्थित होंगे। चंद्रमा का संचार मकर राशि पर रहेगा। महाशिवरात्रि का पर रविवार का दिन, उत्तराषाढ़ा महापर्व मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में ही आता है। महाशिवरात्रि नक्षत्र, व्यतिपात योग, वनिज उपरांत शकुनि करण तथा मकर का चंद्रमा उत्तम संयोग बना रहा है। पंचांग की यह स्थित सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करेगी।
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