Gangapar News: खेल मैदान का अभाव, खेत व खलिहानों में अभ्यास की मजबूरी
Gangapar News: गौहनिया, हिन्दुस्तान संवाद। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन प्रशासन जो
Gangapar News: ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन प्रशासन जो भी दावे करें लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि गांवों में खेल के मैदान नहीं है। जो सरकारी जमीन पड़ी थी उस पर विभिन्न सरकारी इमारतें बन चुकी है। गांव में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल है लेकिन उनके पास मैदान नहीं है और जहां खेल मैदान है वहां पर्याप्त व्यवस्थाएं ही नहीं है। जिसके कारण गांवों में खुले मैदान ही खेत प्रतिभाओं के ग्राउंड बन जाते है। ऐसे में खेलों में ग्रामीण प्रतिभाओं का सामने निकलकर आना असंभव होकर रह गया है। इलाके में ऐसे दर्जनों की संख्या में गांव है जहां न तो गांव में खेलने के लिए जमीन है और न ही स्कूल के पास ही इतनी जगह है कि वहां विद्यार्थी खेल सकें। हालाकि कुछ स्कूलों में खेल ग्रांउड है परन्तु वह भी उदासीनता और शासकीय कार्यप्रणाली के चलते जीर्णोद्धार कर रहे है। जिसके कारण खेल मैदानों की कमी के चलते इन ग्रामीण खिलाडियों को खलिहानों और खेतों के आसपास पड़ी खाली जगह पर अभ्यास करना पड़ रहा है।
खानापूर्ति तक विकसित हुए मैदान
गत वर्षों में भूमि को खेल मैदान के लिए विकसित कराने के निर्देश के बाद कुछ ग्रामों में खानापूर्ति के तौर पर खेल मैदानों को मशीनों और जनसहयोग से विकसित कराने का कार्य शुरु किया गया था परंतु वह मैदान भी बरसात के मौसम के बाद पुन खेतों में तब्दील हो गये है। कुछ गांवो में खेल मैदान विकसित है भी तो स्थानीय ग्रामवासी और खिलाडी उसका लाभ ले पाते है आसपास की ग्रामीण प्रतिभाएं खेल का अभ्यास नही कर पाती जिसके कारण बहुत सी खेल प्रतिभाएँ मैदान अभाव में अपनी प्रतिभाएं दिखाने से महरूम रह जाते है। जिससे खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं।
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