
गोशालाओं में ठंड से कांप रहे गोवंश, बचाव की व्यवस्था नाकाफी
Gangapar News - मांडा। ठंड निरंतर बढ़ने के बावजूद मांडा के सरकारी पांचों गोशाला में ठंड से
ठंड निरंतर बढ़ने के बावजूद मांडा के सरकारी पांचों गोशाला में ठंड से गोवंशों के बचाव की कोई खास व्यवस्था न होने से ठंड में रात भर कांपते गोवंश दो दिन से धूप न निकलने से किसी तरह जी रहे हैं। फटी व आधी अधूरी पन्नी गोवंशों को ठंडी से बचाव में नाकाफी साबित हो रहे हैं। मांडा के सभी गोशालों में साफ सफाई की दशा बेहद खराब होने से गंदगी का अंबार लगा रहता है। ठंडी के मौसम में गोबर का निस्तारण न होने से मच्छर जनित रोगों से भी गोशाला में रह रहे तमाम गोवंश ग्रसित हैं। मांडा क्षेत्र में कुल पांच सरकारी गो आश्रय केंद्र हैं, जिनमें सोमवार को मांडा खास में 345, भवानीपुर के देवरी गोशाला में 320, ऊंचडीह उपरौध ग्राम पंचायत के कुशलपुर गोशाला में 165, पियरी में 223 और केड़वर में 214 गोवंश सहित पांचों गोशाला में कुल 1267 गोवंश रखे गये हैं।
इन गोवंशों के लिए केवल सूखे भूसे का ही स्टाक गोशाला में है। चरही में भूसे डाले जाने के बाद बड़े व मजबूत गोवंश छोटे व कमजोर गोवंशों को मारकर भगा देते हैं और खुद भूसा खा जाते हैं। गोशाला में गोवंशों को बांधने की व्यवस्था या नियम न होने से अक्सर बड़े व मजबूत गोवंश छोटे व कमजोर गोवंशों को घायल करते रहते हैं। गोशाला में ठंड से बचाव के लिए लगी पन्नी गोशाला के छुट्टा गोवंश फाड़ देते हैं, जिससे खुले में उनको ठंडी गुजारनी पड़ रही है। मांडा पशु चिकित्सा अधिकारी मांडा डाक्टर पीके मिश्रा ने बताया कि वे ठंड में गोवंशों के देखभाल व हरे चारे की व्यवस्था के लिए गोशाला संचालकों को निर्देशित किया गया है। गोशाला में ठंड से बचाव के लिए गोपालकों द्वारा लगायी गई आधी अधूरी प्लास्टिक की पन्नी ठंड से कांपते गोवंशों के लिए नाकाफी साबित हो रही है।

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