मौसम का मिजाज देख थ्रेसरिंग और कटाई में आई तेजी
Gangapar News - मांडा। बार बार मौसम का मिजाज बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

बार बार मौसम का मिजाज बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में फसलों की कटाई और खलिहानों में थ्रेसरिंग करते किसान अपनी भूख प्यास और दिन, रात, धूप व गर्मी सभी कुछ भूल गये हैं। बार बार बदलते मौसम के मिजाज के चलते किसान कटाई व थ्रेसरिंग में काफी तेजी से जुट गए हैं। पिछले एक सप्ताह से मौसम में बदलाव अक्सर आकाश में बादल, बरसात, तेज हवा और ओले ने किसानों की नींद उड़ा दी है। मांडा क्षेत्र के सोनबरसा, पचेड़ा, मझिगवां , हाटा न्याय पंचायत के विभिन्न गांवों में बरसात के साथ ओले भी पड़े ।
धनावल गांव के किसान रामचंद्र पाल, राजेश्वर दुबे राम गोविंद, राजकुमार, राम कैलाश, मुन्नूलाल, हीरालाल आदिवासी, वृहस्पति आदिवासी, हीरामणि, मुन्ना लाल आदि किसानों ने बताया कि खेतों की कटाई और थ्रेसरिंग के चलते नींद, भूख सब भूल जैसे गये हैं । वे भूसे का मोह छोड़कर हार्वेस्टर से गेहूं की थ्रेसरिंग करवा रहे हैं।तमाम गांवों के किसानों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से जब गेहूं के पलेवा और सिंचाई के लिए किसानों को पानी की जरूरत रहती है । तब न तो नहरों में पानी आता है और न तो बरसात ही होती है, लेकिन जब खेतों में फसल पककर तैयार हो जाती है , तो नहरों में भी पानी आ जाता है और प्रकृति भी चैत, बैसाख महीने में बरसात करके किसानों की परीक्षा लेती है। प्रकृति के इस कहर को किसान आंखों में आंसू भरकर देखने के अलावा कुछ कर भी नहीं पाता और देखते देखते उसके गाढ़े मेहनत से तैयार फसल का अधिकतर हिस्सा तबाह हो जाता है। फिलहाल अभी तक केवल बादल, बूंदाबांदी और तेज हवा ही है , जिससे मांडा क्षेत्र में खास नुकसान नहीं हो पाया है । यदि बरसात और हवा तेज हुई ,तो किसानों का काफी नुकसान हो सकता है। फिलहाल रोज मौसम का बदलता रुख देखकर खेतों में गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों की कटाई और खलिहानों में थ्रेसरिंग के काम में काफी तेजी आई है। क्षेत्र के सोनबरसा गांव के निवासी किसान विद्या शंकर पाल अपने सरसों और गेहूं की कटाई व थ्रेसरिंग में लगे हैं। इसी तरह बदौआ गांव के किसान भी अपने गेहूं की कटाई करवाकर थ्रेसरिंग के लिए खलिहानों में रात दिन गुजार रहे हैं। सबसे खराब दशा मांडा दक्षिणी पहाड़ी भूभाग में स्थित उपरौध क्षेत्र कहे जाने वाले मांडा विकास खंड के डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांवों की है । इस क्षेत्र की खेती पानी के अभाव में बहुत ही मंहगी और किसानों के लिए कष्टकारी साबित होती है।
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