
खेती के लिए खाद पानी की किल्लत, किसान हताश
Gangapar News - पालपट्टी, हिन्दुस्तान संवाद। भले ही शासन द्वारा किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित
भले ही शासन द्वारा किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित की गई हो पर जमीनी हकीकत देखा जाए तो आज का किसान अन्य सुविधाएं तो दूर खाद और पानी के लिए जूझ रहा है। खाद पानी की समस्या को दूर करने के लिए शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोगों के अतिरिक्त क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तक के दरवाजे खटखटा रहा है। बावजूद इसके उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। जिसको लेकर किसानों में आक्रोश और निराशा दोनों ही व्याप्त होते जा रहे हैं। किसानो की रुचि कृषि कार्य की ओर से दिन प्रतिदिन हटती जा रही है। मायूस किसान मजबूर होकर खेती छोड़ परिवार के भरण पोषण के लिए परदेश जाने को विवश हो रहे हैं।

वर्तमान में की गई गेहूं की खेती को बचाने के लिए किसानों की परेशानी अब उनके मुंह जबानी सुनी जा सकती है। किसानों का कहना है कि अब जब गेहूं की खेती को पानी और खाद की आवश्यकता है तो उस समय न तो नहर में पानी छोड़ा जा रहा है और न ही समिति पर खाद ही मिल पा रही है। परिणाम स्वरुप हमारी गेहूं की बुआई पिछड रही है। खाद के लिए समिति पर जाओ तो वहां खाद नहीं मिलती और पानी के लिए पंप पर जाओ तो वहां मोटर खराब है या विद्युत कटौती चल रही है जिसके कारण पंप बंद है की बात सुन सुन कर अब किसानों में घोर निराशा व्याप्त होती जा रही है। किसान रजनीश तिवारी, बब्बू तिवारी, राजेंद्र प्रसाद, गिरिजा प्रसाद, कृष्ण कुमार, कमलेश कुमार, अशोक कुमार विष्णु कुमार, अभिषेक कुमार आज ने बताया कि क्षेत्र में पानी का सहारा बनी लोहरा पंप से संचालित नहर पानी विहीन चल रही है। जब पानी के लिए पंप पर जाओ तो वहां बिजली नहीं है या मोटर खराब है की बात बताई जाती है। जब हम किसी तरह से अपने निजी संसाधनों द्वारा धान में पानी पहुंचा देते हैं और खाद के लिए क्षेत्र की समितियों सुजनी, इटवा, खूंटा आदि पर जाते हैं तो वहां खाद नहीं है की बात बताई जाती है।

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