फसलों को बचाने के लिए रतजगा कर रहे किसान
Gangapar News - फसलों के लिए रतजगा कर रहे किसान मेजा। छुट्टा पशुओं व नीलगायों ने किसानों की नींद हराम कर रखी है। शिकायत के बावजूद इन पशुओं से किसानों को छुटकारा नहीं

छुट्टा पशुओं व नीलगायों ने किसानों की नींद हराम कर रखी है। शिकायत के बावजूद इन पशुओं से किसानों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। किसान ठंडी रात में फसल की रखवाली करने में जुटे हैं। बारा दशरथपुर गांव के लाल बहादुर यादव, परानीपुर के इन्द्रेश कुमार ने बताया कि खेत में लहालहा रही, गेंहू, जौ, अरहर सहित अन्य फसलों में छुट्टा पशु व नीलगाय घुस जाते हैं, जानकारी होने पर जब तक किसान खेत पहुंचता है, पशु उसे रौंद चुके होते हैं। गंगा के तराई इलाके के विभिन्न गांवों के किसान सबसे अधिक नीलगायों के कहर बरपाने से उबर नहीं पा रहे हैं।
इन पशुओं की वजह से किसानों ने अपने खेत में अरहर, चना जैसी दलहन की फसल बोना छोड़ दिया है। इसके अलावा आलू की खेती व्यापक पैमाने पर होती रही, अब आलू की बोआई पहले जैसी नहीं रह गई, जिन किसानों ने अपने घरों के आसपास आलू उगा रखी है, ऐसे किसानों ने खेत में मानव के आकार का धोख खड़ा कर दिया है। जिससे नीलगाय व सुअर फसल को क्षति न कर सकें। वन्य जीवों से फसल को बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बिजौरा गांव के किसान देवी प्रसाद मिश्र ने बताया कि खेत में बोई गई फसल को जानवर बर्बाद कर दे रहे हैं।
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