
स्वनिर्मित लकड़ी की पुलिया से जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं लोग
Gangapar News - मांडा। आजादी के लंबे अंतराल के बाद भी दो ग्राम पंचायतों के कई मजरों को
आजादी के लंबे अंतराल के बाद भी दो ग्राम पंचायतों के कई मजरों को जोड़ने वाले नाले पर पुलिया न होने से पानी भरे नाले पर लकड़ी की पुलिया खुद बनाकर किसान व आम लोग किसी तरह जान जोखिम में डालकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। मांडा क्षेत्र के भवानीपुर ग्राम पंचायत के खैरुआ गांव के पश्चिमी छोर पर एक नाला है। नाले के दूसरी ओर खुरमा ग्राम पंचायत के कई गांव व मजरे हैं। भवानीपुर, खैरुआ व खुरमा गांव के तमाम किसानों की खेती दोनों गांवों में है। खैरुआ गांव के नाले पर पुल न होने से वाहनों को तो लगभग दस किमी सुरवांदलापुर से चक्कर लगाकर खुरमा गांव पहुंचना होता है, लेकिन नाले के रास्ते से यह दूरी एक किमी भी नहीं है।
ग्रामीणों ने इस नाले पर स्वनिर्मित लकड़ी की पुलिया बनायी है और इसी रास्ते से तमाम किसान, छात्र व व्यवसायी दोनों गांवों में आते जाते हैं। इन दिनों बरसात के बाद से ही पुलिया में पानी भरा हुआ है। ऐसी दशा में लकड़ी के जर्जर पुलिया से आवागमन बहुत ही खतरे से भरा होता है। गांव के ह्रदय पांडेय, मुसुरु पाल, गोले पाल, लखन पाल, निहोर पाल, जय प्रकाश, यासीन अली, बरसाती, मुराद अली, लालन, राजेश कुमार आदि किसानों ने बताया कि जान जोखिम में डालकर लकड़ी के जर्जर पुलिया से अपने खेतों में आना जाना पड़ता है। हर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में इन गांवों के ग्रामीणों द्वारा नाले पर पुलिया निर्माण की जनता प्रतिनिधियों से मांग की जाती है, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही ग्रामीणों को मिलता रहा। तमाम किसानों ने प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन से उक्त नाले पर पुलिया निर्माण कराने की मांग की है।

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