
करछना में डीएपी की किल्लत से परेशान किसान
संक्षेप: Gangapar News - करछना विकास खंड में सहकारी समितियों में डीएपी खाद की भारी कमी से किसान परेशान हैं। आलू और गेहूं की बुवाई का समय है, लेकिन समितियों पर खाद नहीं होने से किसान महंगी निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि सरकार की दोगुनी आय की बात जमीनी हकीकत से उलट है।
करछना विकास खंड क्षेत्र में सहकारिता विभाग द्वारा संचालित किसान साधन सहकारी समितियों में इन दिनों डीएपी खाद की भारी कमी से किसान परेशान हैं। आलू और गेहूं की अगेती बुवाई का समय चल रहा है, लेकिन समितियों पर खाद उपलब्ध न होने से किसानों को मजबूरन निजी दुकानों से ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। समय पर खाद, बीज और सिंचाई की सुविधा न मिलने से किसानों की खेती दिन-ब-दिन महंगी होती जा रही है। ऊपर से मौसम की मार और प्राकृतिक आपदाओं के कारण लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

हरदुआ निवासी किसान जन्मेजय द्विवेदी ने बताया कि वह पिछले दस दिनों से डीएपी के लिए करछना किसान साधन सहकारी समिति का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां डीएपी की जगह महंगी और कम उपयोगी एपीएस खाद दी जा रही है। किसानों का कहना है कि एपीएस उनके काम की नहीं है, इसलिए वे इसे लेने से कतरा रहे हैं। उधर, बाजारों में निजी दुकानदार मनमाने दामों पर डीएपी बेच रहे हैं और इस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। करछना विकास खंड की नौ सहकारी समितियों में डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका है। समितियों के सचिवों का कहना है कि किसानों द्वारा एपीएस न खरीदने से गोदामों में खाद पड़ी हुई है, जिससे नया स्टॉक नहीं आ पा रहा। वहीं, जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन शिव मोहन मौर्य ने कहा कि जिन समितियों ने भुगतान किया है, वहां जल्द ही डीएपी भेजी जाएगी। कुल मिलाकर, डीएपी की किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और बुवाई सीजन में उन्हें आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।

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