इलाके की नहरों में नहीं पानी, कैसे डालें धान की नर्सरी
गौहनिया, हिन्दुस्तान संवाद। किसानों को धान की नर्सरी डालने को पानी की सख्त जरुरत है
किसानों को धान की नर्सरी डालने को पानी की सख्त जरुरत है लेकिन इलाके की नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। पानी के अभाव में किसानों की नर्सरी पिछड़ रही है। जिसका असर धान की रोपाई पर पड़ेगा, रोपाई पिछड़ने से फसल का उत्पादन प्रभावित होगा। किसानों को नहर से पानी पाने के लिए कम से कम एक पखवारे तक इंतजार करना होगा। क्षेत्र की प्रमुख कमला पम्प नहर से निकली करछना रजबाहा समेत कई नहरों में मई से ही पानी नहीं आ रहा है।धान की नर्सरी डालने के समय सभी माइनरे भी सूखी हैं। इलाके के अधिकांश किसानों की खेती नहर के पानी पर ही आश्रित है।
ऐसे में किसानों को धान की नर्सरी डालने को पानी की सख्त जरूरत है। लेकिन इलाके की सभी नहरों में पानी के बजाय धूल उड़ रही है जिससे किसानों को दिक्कतें हो रही हैं। किसानों का कहना है कि पानी के अभाव में धान की नर्सरी पिछड़ी तो धान की रोपाई पर असर पड़ेगा। थान की रोपाई विलंब से होने पर उत्पादन प्रभावित होगा। विभागीय सूत्रों पर भरोसा करें तो पानी जून के दूसरे पखवाड़े तक पानी मेन ब्रांच में छोड़ा जाएगा। ऐसे में किसानों को अभी पखवारे भर पानी का इंतजार करना होगा।
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