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2 मार्च, 2021|3:38|IST

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किसानों व मजदूरों ने बारा तहसील में किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

किसानों व मजदूरों ने बारा तहसील में किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों व मजदूरों ने बुधवार को बारा तहसील पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार को संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार बारा रविकान्त द्विवेदी को सौंपा।

किसानों, मजदूरों ने कहा कि तीन कानूनों के अमल के बाद विदेशी कम्पनियां, बड़े प्रतिष्ठान अनाज व अन्य फसलों के व्यापार में अपनी मंडियां स्थापित कर लेंगे, किसानों से ठेका खेती कराएंगे, लागत के सामान की बिक्री, भंडारण, शीत भंडारण, परिवहन, फसल व प्रसंस्कृत फसल की बिक्री पर अपना प्रभुत्व जमाएंगे। वे ये सारा कार्य तरह-तरह के बिचैलियों के माध्यम से करेंगे, जैसे- ठेके की खेती के लिए जमीन एकत्र करना व बिक्री के लिए फसल एकत्र करना एग्रीगेटर करेगा। लागत की आपूर्ति बिचैलिया करेगा। फसल की गुणवत्ता पारखी तय करेगा और निजी मंडिया अपना अलग से शुल्क वसूलेंगी। किसान को अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ेगी, मंहगी लागत खरीदनी पड़ेगी और खेती करने व फसल की बिक्री की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी। ये तीन कानून कारपोरेट को खाने की जमाखोरी व कालाबाजारी करने की पूरी छूट देगा, क्योंकि इन कानूनों के तहत भारत सरकार खाने को आवश्यक वस्तु नहीं गिनेगी। विरोधकर्ताओं ने उ.प्र. सरकार को एक अलग ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि सरकार रवन्ने के सरकारी रेट 65 रु0 प्रति घनमीटर की जगह 700 रु0 घन मीटर की वसूली करा रही है जिससे बालू की बिक्री प्रभावित है और यह अतिरिक्त कमाई पुलिस अफसरों व भाजपा नेताओं की जेब में जा रही है। उन्होंने मांग की कि इस आदेश को वापस लेकर नाव से बालू खनन का कार्य सुचारू रूप से चलाया जाए। प्रदर्शन में भाग लेने वालों में प्रमुख रूप से राज कुमार पथिक , का0 हीरालाल, राम कैलाश कुशवाहा, सुरेश निषाद, विनोद निषाद, पप्पू निषाद, मोतीलाल, रामबरन, सतीश पटेल, भैरोलाल पटेल, रामराज, रोहित आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Farmers and laborers protest in Bara tehsil submitted memorandum