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उर्द मूंग के दाम गिरने से किसानो के चेहरे पर मायूसी

किसानों की बोनस की खेती उर्द और मूंग इस बार उनके दाम सस्ते होने की वजह किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। वे मायूस है। फिर भी किस्मत को कोसते हुए किसान कुनबे के साथ फली की तोड़ाई में जुटा गया है। आलू और गेंहू की कटाई के बाद क्षेत्रीय किसान उर्द और मूंग बोकर अपनी बोनस की फसल काटते है। पिछले कई वर्षो से बोनस की खेती मूंग और उर्द के दाम अच्छे होने से किसानो मे खुशहाली रहती थी। लेकिन इस वर्ष उर्द और मूंग के दाम पिछले वर्षो की अपेक्षा आधा दाम मिल रहा है। जिससे किसान हताश और निराश है। क्षेत्र के मोतिहां, पकरी, बरौना, दादूपुर, पयागीपुर, समोधीपुर, मदारीपुर, चांदोपारा, भगतपुर, बरईतारा, आराकला, बरियारी आदि सैकड़ो गांवों में किसानों के खेतों में इस भयंकर गर्मी में भी मूंग और उर्द की फसल लहलहा रही है। पिछले वर्ष मूंग 6000 से 7000 रूपये प्रति क्विंटल था। वहीं उर्द लगभग 10000 रूपये क्विंटल थी लेकिन इस वर्ष मूंग 3500 रुपये क्विंटल और उर्द 4000 रूपये क्विंटल किसानों से खरीदा जा रहा है। आधे दाम मिलने पर किसानों में मायूसी है। भगतपुर गांव के किसान रामचन्द्र पटेल अपने कुनबे के साथ मूंग की फसल की फली को तोड़ने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की नयी सरकार पर बहुत उम्मीद थी परंतु सरकार ने उर्द मूंग के दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा आधा करके किसानों के साथ अन्याय किया है। एक सप्ताह पर फसल को पानी दे रहे रामचन्द्र बताते है कि लागत निकलना मुश्किल हो गया है। इसी प्रकार चांदोपारा गांव के किसान हरीशंकर पटेल, रामचन्द्र विश्वकर्मा, विजय बहादुर पटेल, आदि किसानों ने बताया कि इस वर्ष उर्द और मूंग की फसल भी पिछले वर्ष की अपेक्षा कम पैदावार है। दाम भी कम होने से इन किसानों मे मायूसी है। इसी प्रकार ज्वालापुर के किसान फूलचन्द्र पटेल ने बताया कि किसानो की बोनस की खेती उर्द और मूंग पर बहुत ही गर्व था किसानो को इस फसल को बेचकर नकद पैसा मिलता है। लेकिन दाम कम होने से उनके अरमानो पर पानी फिर गया।

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  • Web Title:Desperation on the face of farmers by falling prices of urad moong