बोले प्रयागराज : काले हिरणों के लिए चारा है न छाया, सुरक्षा के अभाव में कुत्ते करते हैं हमला
Gangapar News - कर्मचारी रहे लापता अभयारण्य रहा लावारिश मेजा।तहसील मेजा से लगभग तीस किलोमीटर चांद खम्हरिया के जंगली इलाके में सैकड़ों की संख्या ब्लैक बग पाए जाते हैं,
तहसील मेजा से लगभग तीस किलोमीटर चांद खम्हरिया के जंगली इलाके में सैकड़ों की संख्या में ब्लैक बग यानी काले हिरण पाए जाते हैं, लेकिन वनकर्मी इनके प्रति संवेदनशील नहीं हैं, जिससे स्वच्छन्द विचरण करने वाले इन वन्य जीवों की संख्या उस हिसाब से नहीं बढ़ पा रही है। अभयारण्य के आसपास हरे चारे का अभाव है, ऐसी दशा में हिरण चारे के चक्कर में काफी दूर चले जाते हैं, एकान्त पाकर शिकारी कुत्ते इन पर आक्रमण कर देते हैं। पार्क में इनके रहने के लिए छाया दार वृक्ष होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है, जंगली पेड़ तो मौजूद हैं, लेकिन छायादार नहीं हैं, जिससे गर्मी के दिनों में ताप से बचने के चक्कर में हिरण पार्क में न बैठकर काफी दूर चले जाते हैं।
लगभग 126 हेक्टेयर जमीन के कुछ हिस्से को पत्थर से घेरकर सुरक्षित तो बनाया गया है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से इसकी ऊंचाई कम है। ऐसे में कई बार लोग अंदर घुस आते हैं जिस पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। शुक्रवार को दोपहर बारह बजे तक कोई भी कर्मचारी अभयारण्य के आसपास मौजूद नहीं था। लगभग आधा किलोमीटर दूर दो दर्जन से अधिक हिरण कुलाचे मार रहे थे, इन्हें देख चार पहिया वाहन से पहुंचे कुछ लोग इनके उछल कूद को अपने मोबाइल में कैद कर रहे थे। इस प्रकार की घटनाएं अभयारण्य के आसपास मैदान में अक्सर देखने को मिल सकती हैं। अभयारण्य में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था सिर्फ सौर ऊर्जा संचालित मोटर चल रही थी, लेकिन घंटों तक वहां कोई कर्मचारी नहीं पहुंच सका। चारों तरफ सूनसान इलाके में कोई भी हिरण को परेशान कर सकता था, हालांकि वन दरोगा रामचन्द्र ने बताया कि वह इलाके में हैं। गत दिनों चांद खम्हरिया के कृष्ण मृग संरक्षित क्षेत्र में हिरणों को दौड़ाने वालों के खिलाफ वन विभाग की ओर से सुसंगत धाराओं के तहत लिखापढ़ी कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से तीन लोगों को जेल भेज दिया गया था। यह घटना मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की मौजूदगी में हुई थी। उन्होंने ही वॉच टावर से देखा था कि कुछ लोग हिरणों को दौड़ा रहे थे। उनके निर्देश पर ही वनकर्मियों ने मौके पर जांचकर लोगों को पकड़ा था। इन वन्य जीवों की सुरक्षा व संरक्षा के लिए मेजा ऊर्जा निगम की ओर से लगभग ढाई करोड़ रुपये दिए गए थे। इस धन से अभयारण्य गेट, इंटरलांकिग सड़क वाच टावर, सोलर पैनल, अधिकारी आवास, स्नानागार सहित अन्य कार्य किए गए थे। इनमें बिजली की व्यवस्था न होने से सौर ऊर्जा के उपकरण कुछ माह बाद चोर उठा ले गए थे। इस वजह से काफी दिनों तक वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं थी, इस समस्या को देखते हुए सोलर पैनल स्थापित कर दिया गया, लेकिन हरा चारा की व्यवस्था न होने से हिरण घेरवाड़ से बाहर निकल खेतों को चले जाते हैं। इसके अलावा वन्य जीवों की निगरानी के लिए मेन गेट के पास टाइप टू आवास का निर्माण करवा दिया। लेकिन कर्मचारी अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। इस क्षेत्र में वन्य जीव हिरणों की संख्या सैकड़ों से उपर की है, कभी-कभार शिकारी कुत्ते इन जीवों पर हमला कर मार डालते हैं। जानकारी यदि समय पर होती है तो आसपास के गांवों के लोग इनकी सुरक्षा के लिए दौड़ पड़ते हैं। अब तक कई हिरण इन शिकारी कुत्तों के निवाला बन चुके हैं। वन रेंजर अजय सिंह वर्ष भर पहले वन क्षेत्र के आसपास रहे शिकारी कुत्तों को पकड़वाकर मध्यप्रदेश की सीमा पर नारीबारी के पास छोड़वा दिए थे। वन भूमि पर बन गए कई मकान चांद खम्हिरया के अभयारण्य से एक किलामीटर दूर वन क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ भूमि पर आसपास के लोगों ने अवैध कब्जा कर अपना भवन निर्माण कर लिया है। वनकर्मी इसके प्रति पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। वन भूमि पर बस्ती बस जाने से वन्यजीव दूर भाग रहे हैं। चांद के मोजरा वन क्षेत्र में एक दशक पहले इक्का-दुक्का घर वन क्षेत्र में बने थे, अब सैकड़ों लोगों की बस्ती बन चुकी है। बस्ती आबाद हो जाने से वन क्षेत्र कम हो गया, शोरगुल अधिक होने से स्वच्छन्द विचरण करने वाले काले हिरण दूर भाग रहे हैं।पर्यटकों के लिए बन रहे आवासतहसील मेजा मुख्यालय से लगभग चालीस किलोमीटर दूर वन क्षेत्र चांद खम्हरिया व महुली में दुर्लभ प्रकार के ब्लैक बग की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन विभाग की ओर से करोड़ों रुपये की मंजूरी दी गई है। तीन करोड़ अस्सी लाख रुपये से निर्मित होने वाले आवास निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन यूपीपीसीएल को दिया गया है। जो वन क्षेत्र अभ्यारण्य से लगभग चार सौ मीटर दूर निर्मित किया जा रहा है। लगभग पॉच हजार स्क्वायर मीटर में निर्मित हो रहे, पर्यटकों के आवास में छप्पर नुमा गजीबोहट्ट व कच्चे कमरों का निर्माण कार्य हो रहा है। इस कार्य को दो वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाना है। कार्यदाई संस्था के ठेकेदार शेषनारायण करवरिया ने बताया कि समूचे देश में राजस्थान के बाद दुर्लभ प्रजाति के ब्लैकबग यानी काले हिरण सिर्फ मेजा के चॉदखम्हरिया महुली में बहुतायत संख्या में पाये जाते हैं। राजस्थान में इन वन्य जीवों की विश्नोई समाज पूजा करता है। काले हिरणों की बढ़ रही संख्याचांदखम्हरिया के वन क्षेत्र में काले हिरणों की संख्या लगभग साढ़े पांच सौ से ऊपर है। इनके संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से कृष्ण मृग अभ्यारण्य बनाया गया है। जहां पर वाचटावर, सौर उर्जा संचालित पम्प मशीन, इंटरलाकिंग, वन रक्षक आवास, सड़क सहित अन्य विकास कार्य किए गए हैं। अभ्यारण्य में विचरण करने वाले काले हिरणों को देखने के लिए जनपद ही नहीं गैर जनपदों के लोग चॉदखम्हरिया पहुंचते हैं। वर्ष 2019 इनकी संख्या लगभग 522 थी। अब इनकी संख्या 700 से उपर हो चुकी है। महुली के प्रधान विमलनारायण तिवारी ने बताया कि चांद खम्हरिया की प्रधान मंजू पत्नी श्री नारायण पांडेय ने 126 हेक्टेयर जमीन कई वर्ष पहले अभयारण्य के लिए दे रखी थी, हिरणों के लिए जमीन की और अधिक आवश्यकता थी, इसलिए उन्होंने महुली ग्राम पंचायत 38 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव कर दिया। यह जमीन ब्लैकबग पार्क से कुछ दूरी पर स्थित है। प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा टीम के साथ हिरणों को देखने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने वन विभाग व आस-पास के गॉवों के लोगों से विभिन्न विन्दुओं पर वार्ता करते हुए वन विभाग को धन उपलब्ध कराने की बात कह रखी है।बोले जिम्मेदारब्लैक बग की सुरक्षा बहुत जरूरी है, जल्द ही चांद खम्हरिया के कृष्ण मृग अभयारण्य जाएंगे, जो कुछ भी हो सकेगा, धन उपलब्ध करवा कर इनकी संख्या में वृद्धि कराने का प्रयास करेंगें।-उज्जवल रमण सिंह, सांसद, इलाहाबाद चांद खम्हरिया के जंगली इलाके में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रकार के इन हिरणों के लिए उनकी ओर से जमीन दी गई है। उनके स्तर से जो भी हो सकेगा, इनकी बद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाएं जाएंगे।-सुरेन्द्र प्रताप यादव, एसडीएम, मेजा कृष्ण मृग के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए उनके स्तर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं। शुक्रवार को जो कर्मचारी अभयारण्य में मौजूद नहीं थे, उनसे पूछताछ की जाएगी। कर्मचारियों की संख्या कम है, फिर भी वह आसपास रहे होंगे, सोलर पंप चल रहा था, इसका मतलब कर्मचारी मौजूद थे।-अजय सिंह, वन रेंजर, मेजा---------------------------हमारी भी सुनें कृष्णमृग क्षेत्र अभयारण्य में रहने वाले हिरणों की सुरक्षा के लिए तैनात वन दरोगा व कर्मचारी कभी-कभार रहते हैं, जिससे आसपास का वातावरण असुरक्षित है। ऐसी दशा में लाखों रूपए से निर्मित आवास, सोलर पंप सहित अन्य सामान व किसी भी समय चोरी हो सकता है।-विमल नारायण तिवारी, प्रधान, मेजा हिरनों के लिए वन क्षेत्र में चारे का अभाव है, ऐसी दशा में वन्य जीव जंगल के आसपास रहे गेंहू के खेतों में रही फसल को नुकसान कर रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।-शंभूनाथ पाल, मोजरा चांद, मेजा हिरनों की सुरक्षा व देखरेख के लिए लगाए गए कर्मचारी लापरवाही करते हैं, ऐसी दशा में पार्क में रहने वाले हिरन उनके खेतों में पहुंच फसल को नष्ट कर रहे हैं, कई किसान नीलगाय व हिरनों से अपनी फसल को बचाने के लिए खेत के आसपास ड्यिूटी कर रहे हैं।-लक्ष्मण पाल, मोजरा चांद मेजाहिरनों की सुरक्षा के लिए घेरवाड़ सही नहीं बनाया गया है, अभयारण्य पार्क में छायादार वृक्ष व हरे चारे का अभाव है, नमक चाटने के लिए बनाए गए गड्ढे में नमक कभी नहीं रखा जाता, इनकी उपेक्षा की जा रही है।-कृपाशंकर, चांद खम्हरिया, मेजा कृष्ण अभयारण्य पार्क में पानी की व्यवस्था होने के बावजूद हिरनों के लिए हरे चारे का इंतजाम नहीं किया जा सका है, अलावा इसके पार्क में छायादार बृक्ष का अभाव है, गर्मी के दिन में वन्य जीव इस पार्क के बाहर रहते हैं।-अनिल कुमार निवासी, सीकीं खूंटा, मेजाशासन व वन विभाग के उच्चाधिकारियों को चाहिए कि अभयारण्य को हराभरा कर आकर्षित करे, जिससे पर्यटन को बढ़वा मिल सके- जनपद ही नहीं गैर जनपदो से भारी संख्या में लोग काले हिरन को देखने पहुंचे तो आसपास के लोगों को रोजगार मिल सकता है।-अनिल कुमार केशरी, सिरहिर, मेजावन विभाग के कर्मचारी अपने कार्य के प्रति लापरवाह बने हुए हैं जिससे वन क्षेत्र की जमीन पर अवैध तरीके से लोग कब्जा कर रहे हैं, शासन प्रशासन को संज्ञान लेने की आवश्कता है।-जटाशंकर पांडेय, सिरहिर, मेजा हिरनों की सुरक्षा व संरक्षा का उपाय वन विभाग को करने की आवश्कता है, पार्क में ही इनके हरे चारे की व्यवस्था कर दी जानी चाहिए, ताकि वन्य जीव किसानों के खेतों में न पहुंच सकें।-नौरंगी लाल, सींकी खुर्द, मेजावन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों को इन दुर्लभ प्रकार के जीवों के प्रति सर्तक रहने की आवश्कता है, वन पार्क से आधे किलोमीटर दूर पर्यटन विभाग की ओर से आवास बनाए जा रहे हैं, जो लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगें, वह खुद भी इन वन्य जीवों की सुरक्षा, संरक्षा व संवर्द्धन को लेकर संजीदा हैं।-योगेश शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता
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