
कड़ाके की ठंड और पाले से फसलों की सुरक्षा किसानों के लिए चुनौती
Gangapar News - बाबूगंज। प्रदेश के कई जनपदों में ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के
प्रदेश के कई जनपदों में ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार सामान्य से अधिक ठंड पड़ सकता है। ऐसे हालात में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि फसलों पर भी ठंड का असर पड़ेगा। खासकर रबी सीजन में गेहूं के अलावा सरसों के साथ सब्जी वाली फसलें पाले से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। कार्डेट के प्रधानाचार्य डॉ डीके सिंह ने बताया कि रात के समय तापमान अचानक गिरने पर फसलों में पाला जमने लगता है। पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी जमकर बर्फ बन जाता है, जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं और पौधे मुरझा जाते हैं।
टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च, प्याज, चना, मसूर, मटर जैसी फसलें और नई बुवाई वाली नाजुक फसलें पाले से सबसे ज्यादा नुकसान झेलती हैं। कई बार सिर्फ एक रात का पाला किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद कर देता है। पाले से फसल की वृद्धि रुक जाती है, गुणवत्ता गिरती है और उत्पादन कम हो जाता है। इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए समय रहते सही उपाय अपनाकर फसलों की सुरक्षा करना हर किसान के लिए जरूरी है, ताकि ठंड के मौसम में भी उनकी मेहनत सुरक्षित रह सके। पाले से बचाव के देसी उपाय -चूल्हे की राख का पानी में घोल बनाकर शाम के समय छिड़काव करने से पौधों पर सुरक्षात्मक परत बनती है। -खेत में सूखा या हल्का गीला कूड़ा-करकट जलाकर धुआं करने से ठंडी हवा का असर कम होता है। -पाले से पहले हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है और जड़ें सुरक्षित रहती हैं। -रात रात में गीला चारा जलाकर लगातार धुआं देना भी बेहद कारगर उपाय है। -साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और समय रहते तैयारी करना जरूरी है।

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